नमाजी के सामने से गुज़रना हराम है, चाहे वह मस

नमाजी के सामने से गुज़रना हराम है, चाहे वह मस्जिदे हराम के अंदर ही क्यों न होः

24- नमाजी के सामने से गुज़ना जाइज़ नहीं है जब कि उस के सामने सुत्रा हो, और इस बारे में मस्जिदे हराम और उस के अलावा दूसरी मस्जिदों के बीच कोई अंतर नहीं है, अतः सभी मस्जिदें जाइज़ न होने में बराबर और समान हैं, क्योंकि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का यह फरमान आम (सामान्य) है किः "अगर नमाजी के सामने से गुज़रने वाले को यह पता चल जाए कि उस पर कितना गुनाह है, तो उस के लिए चालीस (साल, या महीना, या दिन तक) खड़ा रहना इस बात से अच्छा होता कि वह नमाज़ी के सामने से गुज़रे।" अर्थातः नमाज़ी और उस के सजदह की जगह के बीच से गुज़रना। ( और जहाँ तक उस हदीस का संबंध है जिस में यह वर्णन है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बिना सुत्रा के ‘मताफ’के किनारे नमाज़ पढ़ी और लोग आप के सामने से गुज़र रहे थे, तो यह सही नहीं है। जब कि इस हदीस में इस चीज़ का वर्णन नहीं है कि लोग आप के और आप के सजदह करने की जगह के बीच से गुज़र रहे थे। )

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