तीसराः नीयत

तीसराः नीयत

28- नमाज़ी के लिए ज़रूरी है कि जिस नमाज़ के लिये खड़ा हुआ है उस की नीयत करे और अपने दिल में उस को निर्धारित करे जैसे उदाहरण के तौर पर ज़ुहर या अस्र की फर्ज़, या उन दोनों की सुन्नत, और यह नमाज़ की शर्त या रुक्न है, किन्तु जहाँ तक नीयत को अपनी ज़ुबान से कहने का संबंध है तो यह बिद्अत और सुन्नत के खिलाफ़ है, और मुक़ल्लिदीन जिन इमामों की पैरवी करते है उन में से किसी एक ने भी यह बात नहीं कही है।

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