पाँचवां : क़िराअत

पाँचवां :क़िराअत

46- फिर अल्लाह तआला से पनाह मांगे।

47- और सुन्नत (मसनून तरीक़ा) यह है कि वह कभी यह दुआ पढ़ेः "अऊज़ो बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम ; मिन हम्ज़िही, व नफ्ख़िही, व नफ्सिही" (मैं अल्लाह के शरण में आता हूँ शापित शैतान ; उस के वस्वसे़, उस की घमण्ड, और उस के जादू से) यहाँ पर नफ्स से मुराद निंदित पद्य (काव्य) है।

48- और कभी कभार यह दुआ पढ़ेः "अऊज़ो बिल्लाहिस् समीइल अलीमि मिनश्शैतानिर्रजीम... "

49- फिर जहरी (ज़ोर से पढ़ी जाने वाली) और सिर्री (आहिस्ता से पढ़ी जाने वाली) दोनों नमाज़ो में आहिस्ता से "बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम" पढ़े।

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