जल्सा-ए- इस्तिराह़त का बयान

जल्सा-ए- इस्तिराह़त का बयानः

122- जब दूसरे सज्दे से अपना सर उठाये और दूसरी रक़अत के लिये खड़ा होना चाहे तो वजूबी (अनिवार्य) तौर पर अल्लाहु अकबर कहे।

123-और कभी कभार अपने दोनों हाथों को उठाये।

124- और उठने से पहले अपने बायें पैर पर पूरी तरह इतमिनान और सुकून के साथ बैठ जाये, यहाँ तक कि हर हड्डी अपनी जगह पर वापस लौट आये।

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