तशह्हुद के लिये बैठना

तशह्हुद के लिये बैठनाः

129- जब दूसरी रकअत से फारिग़ हो जाये तो तशह्हुद के लिये बैठ जाये, और यह वाजिब है।

130- और बायाँ पैर बिछाकर बैठ जाये जैसाकि दोनों सज्दों के बीच बैठने के तरीक़े के वर्णन में गुज़र चुका है।

131- किन्तु यहाँ पर इक़आ वाली बैठक जाइज़ नहीं है।

132- और अपनी दायीं हथेली को अपने दायें घुटने और रान पर रखे, और अपनी दायीं कुहनी के सिरे को अपनी रान पर रखे, उस को उस से दूर न करे।

133- और अपनी बायीं हथेली को अपने बायें घुटने और रान पर फैला (बिछा) ले।

134- और उस के लिए अपने हाथ पर टेक लगा कर बैठना जाइज़ नहीं है, खास तौर से बायें हाथ पर।