वित्र का क़ुनूत, उस की जगह और उस के शब्द

वित्र का क़ुनूत, उस की जगह और उस के शब्दः

163- जहाँ तक वित्र के अन्दर क़ुनूत पढ़ने का संबंध है तो यह कभी कभार मसनून है।

164- और इस के पढ़ने की जगह, क़ुनूते नाज़िला के विपरीत, रुकू से पहले है।

165- और इस के अन्दर निम्नलिकित दुआ पढ़ेः

"अल्लाहुम्मह-दिनी फी मन् हदैत, व आफिनी फी मन आफैत, व त-वल्लनी फी मन तवल्लैत, व बारिक ली फी मा आ'तैत, व क़िनी शर्रा मा क़ज़ैत, फ-इन्नका तक़्ज़ी वला युक़्ज़ा अलैक, व-इन्नहू ला यज़िल्लो मन वालैत, वला य-इज़्ज़ो मन आदैत, तबारक्ता रब्बना व-तआलैत, वला मन्जा मिन्का इल्ला इलैक"

166- यह दुआ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सिखाई हुई है, अतः जाइज़ है ; क्योंकि सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम से साबित है।

167- फिर रुकू करे और दो सज्दे करे, जैसा कि पहले गुज़र चुका है।

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