हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की र

हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमकी रिसालत व नुबुव्वत पैग़म्बरी-ईश्दूतत्व कीपुष्टि करने वाले मूलग्रंथों से कुछ प्रमाण

क़ुरआन करीम से प्रमाणः

  1. अल्लाह तबारकव तआला फरमाता हैः

"(लोगो!)मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तुम्हारे आदमियों में से किसी के बाप नहीं, लेकिन आप अल्लाह के पैग़म्बरऔर सारे नबियों (ईश्दूतों) के समाप्त कर्ता हैं"। (सूरतुल-अहज़ाबः ४०).

  1. ईसा अलैहिस्सलामने इनजील में मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के नबी (ईश्दूत) होने की शुभ सूचना दी है, अल्लाह तआला काफर्मान हैः

"और जब मर्यम के बेटे ईसा(अलैहिस्सलाम) ने कहा, ऎ (मेरी क़ौम) बनी इस्राईल! मैं तुम सब की ओर अल्लाह का पैग़म्बर(ईश्दूत) हूँ, अपने से पहले की ग्रंथ तौरात की मैं पुष्टि करने वाला हूँ और अपनेपश्चात आने वाले एक रसूल (पैग़म्बर) की मैं तुम्हें शुभ सूचना देने वाला हूँ जिसकानाम अहमद है"।(सूरतुस-सफः६)

  1. तथा अल्लाह तआला नेफरमायाः

"जो लोगऎसे उम्मी जो (पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे) नबी पैग़म्बर की पैरवी (अनुसरण) करते हैं जिनको वह लोग अपने पास तौरात व इनजील में लिखा हुआ पाते हैं। वह उनको अच्छी (नेक) बातोंका आदेश देते हैं और बुरी बातों से मनाही करते हैं और पवित्र चीज़ों को हलाल (वैध)बताते हैं और अपवित्र् चीज़ों को उन पर हराम (अवैध, वजिर्त) बताते हैं, और उन लोगोंपर जो बोझ और तौक़ थे उनको दूर करते हैं। सो जो लोग उस पैग़म्बर पर ईमान लाते हैंऔर उनका सहयोग करते हैं और उनकी सहायता करते हैं और उस नूर (प्रकाश अर्थात क़ुरआन करीम) की पैरवी करते हैं जो उनके साथ भेजा गया है, ऎसे लोग सफलता पाने वाले हैं।"(सूरतुल-आराफः १५७)

सुन्नते नबवी से प्रमाणः

पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः

"मेरा और मुझ से पहलेके पैग़म्बरों का उदाहरण उस व्यक्ति के समान है जिसने एक घर बनाया, उसे संवारा औरसजाया किन्तु उसके एक कोने में केवल एक ईंट की जगह ऎसे ही छोड़ दिया। लोग उसकीपरिक्रमा करने लगे और उस पर आश्चर्य प्रकट करने लगे और कहने लगेः यह एक ईंट क्योंनहीं रखी गई? पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमने फरमायाः "तो मैं ही वह ईंट हूँ और मैं सारे नबियों कासमाप्त कर्ता हूँ"।(सहीह बुख़ारी व सहीह मुस्लिम)

इन्जील से प्रमाणः

इन्जील (बर्नाबा ११२:१६-८०) में उल्लेख कियागया है कि ईसा अलैहिस्सलाम ने कहाः "इसलिए कि अल्लाह मुझे धरती से ऊपर चढ़ा लेगाऔर विश्वास घती के रूप को बदल देगा यहाँ तक कि हर एक उसे मुझे ही गुमानकरेगा। इसके बावजूद जिस समय वह बुरी मौत मर जायेगा मैं संसार में एक लम्बे समय तकउस लज्जा में बाक़ी रहूँगा। किन्तु जब अल्लाह के पवित्र पैग़म्बर मुहम्मदसल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आयेंगे तो मुझ से यह कलंक मिट जायेगा।"

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