पोशाक की सुन्नतें

पोशाक की सुन्नतें:

अधिकांश लोगों के साथ जो बातें रात-दिन में बार बार पेश आती रहती हैं उन्हीं में धोने केलिए या सोने आदि केलिए कपड़े को पहनना और उतारना भी शामिल है.
कपड़े को पहनने और उतारने के लिए भी कुछ सुन्नत हैं:
१ -पहनने के समय और उतारने के समय"बिस्मिल्लाहिर-रहमानिर-रहीम"(अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यंत दयावान है) पढ़ना चाहिए. इमाम नववी ने कहा है कि यह पढ़ना सभी कामों के समय एक अच्छी बात है.
२- हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो- जब कोई पोशाक, या कमीज पहनते थे, या कोई चादर ओढ़ते थे या पगड़ी बांधते थे तो यह दुआ पढ़ते थे:

( اللهم إني أسألك من خيره وخير ما هو له ، وأعوذ بك من شره وشر ما هو له )
अल्लाहुम्मा इन्नी असअलुका मिन खैरेही व खैरे मा हुवा लहू, व अऊज़ु बिका मिन शररिही व शररि मा हुवा लहू.
हे अल्लाह!मैं तुझ से मांगता हूँ इसकी भलाई और जो जो भलाई उसके लिए है, और मैं तेरी शरण में आता हूँ उसकी बुराई से और जो जो बुराई उसके लिए है.) इसे अबू -दाऊद, तिरमिज़ी ने उल्लेख किया है, और इसे इमाम अहमद ने भी उल्लेख किया है और इब्ने-हिब्बान ने इसे विश्वसनीय बताया है और हाकिम ने भी इसे सही बताया और कहा कि यह हदीस इमाम मुस्लिम की शर्तों पर उतरती है और इमाम ज़हबी भी उनके इस विचार में उनके सहमत हैं.

३ – पहनने के समय भी दाहिने से शुरू करना. क्योंकि हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो- की हदीस में है:जब तुम पहनो तो तुम अपने दाहिने से शुरू करो) इसे इमाम तिरमिज़ी, अबू-दाऊद और इब्ने-माजा ने उल्लेख किया है, और यह हदीस विश्वसनीय है.
४ – और जब अपने कपड़े या पाजामे को उतारे तो पहले बायें को उतारे, फिर दाहिने को उतारे.

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