पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - लोगों से भेंट करते समय की सुन्नतें



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

लोगों से भेंट करते समय की सुन्नतें :

१) सलाम करना: क्योंकि हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृपाऔर सलाम हो-से पूछा गया कि कौनसा इस्लाम सब से अच्छा है? तो उन्होंने कहा: (आप भोजन खिलाएं औरसलाम करें जिसको आप पहचानें उसको भी और जिसको न पहचानें उसको भी l) इसे बुखारी और मुस्लिम ने उल्लेख किया l

 एक आदमी हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृपाऔर सलाम हो-के पास आया और कहा "अस्सलामु-अलैकुम" (शांति हो आप पर) तो उन्होंने सलाम का जवाब दिया, फिर वह बैठ गया, तो हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृपाऔर सलाम हो-ने कहा: दस (१०)(यानी दस पुण्य)lउसके बाद एक दूसरा आदमी आया और कहा: "अस्सलामु-अलेकुम व रहमतुल्लाहि" (शांति और अल्लाह की दया हो आप पर) तो उन्होंने उसके सलाम का जवाब दिया और फिर वह बैठ गया, तो हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृपाऔर सलाम हो-ने कहा: बीस (२०) (यानी बीस पुण्य)lउसके बाद एक और व्यक्ति आया और उसने कहा: "अस्सलामु-अलेकुम व रहमतुल्लाहि व बराकातुहू" (शांति और अल्लाह की दया और उसकी बर्कतें हो आप पर)  तो उन्होंने उसके सलाम का जवाब दिया और वह बैठ गया तो हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृपाऔर सलाम हो-ने कहा: तीस (३०)(यानी तीस पुण्य)lइसे अबू-दाऊद ने उल्लेख किया है और तिरमिज़ी ने इसे विश्वसनीय बताया है l
 अल्लाह आपको अच्छा रखे! देखा आपने कि जिसने पूरा सलाम न करके केवल कुछ शब्द पर ही बस कर दिया तो उसने कितने पुण्य से अपने आपको वंचित रखा, यदि वह पूरा सलाम करता तो उसे तीस पुण्य मिल जाते थेlयाद रहे कि एक पुण्य की कम से कम क़ीमत दस पुण्य के बराबर होती हैlइस तरह उसे ३०० (तीन सौ) पुण्य मिल जाते थे lऔर कभी कभी तो एक पुण्य की क़ीमत अल्लाह के पास काई कई गुने होते हैं l
 इसलिए मेरे प्रिय भाई! आप अपनी जीभ को इस बात की आदत लगाइए और सलाम को सदा पूरा कहा करें और "अस्सलामु-अलेकुम व रहमतुल्लाहि व बराकातुहू" (शांति और अल्लाह की दया और उसकी बर्कतें हो आप पर) कहा करें ताकि आपको यह सारा पुण्य प्राप्त होसके l   
 ज्ञात हो कि एक मुसलमान अपने दिन और रात में कई कई बार सलाम करता है, मस्जिद में प्रवेश करते समय और मस्जिद से निकलते समय इसी तरह घर से निकलते समय और घर में प्रवेश करते समय भी सलाम करता है l 
 मेरे भाई! यह मत भूलिए कि जब एक व्यक्ति किसी से जुदा होता है तो सुन्नत है कि पूरा पूरा सलाम के शब्द बोले क्योंकि शुभ हदीस में है: जब तुम में से कोई किसी बैठक में पहुंचे तो सलाम करे, और जब जुदा हो तो भी सलाम करे, क्योंकि पहली दूसरी से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है l(यानी दोनों मिलते समय और जुदा होते समय सलाम करना महत्वपूर्ण हैं) इसे अबू-दाऊद और तिरमिज़ी ने उल्लेख किया है l
 यदि एक व्यक्ति इसकी पाबंदी करता है तो मसजिद से घर और घर से मसजिद को आते जाते इस सुन्नत की कुल संख्या बीस २० बार हो जाती है, और इसकी संख्या बढ़ भी सकती है यदि घर से काम के लिए निकलता है और रास्ते में लोगों से भेंट होती है, अथवा जब किसी से फोन पर बात करता है और सलाम करता है l   
मिलते समय मुस्कुराना: क्योंकि हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृपाऔर सलाम हो-ने कहा:" पुण्यों में से किसी भी पुण्य को हरगिज़ घटिया मत समझो, भले ही अपने भाई से मुस्कुराकर मिलने का पुण्य ही हो l" इसे इमाम मुस्लिम ने उल्लेख किया है l 
मिलते समय हाथ मिलाना: क्योंकि हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृपाऔर सलाम हो-ने कहा: जब भी दो मुसलमान मिलते हैं और एक दूसरे से हाथ मिलाते हैं तो दोनों के जुदा होने से पहले उन्हें क्षमा दे दिया जाता है l

इसे अबू-दाऊद, तिरमिज़ी और इब्ने-माजा ने उल्लेख किया है l 
इमाम नवावी ने कहा है : ज्ञात होना चाहिए कि प्रत्येक भेंट के समय हाथ मिलाना पसंदीदा बात है l
 तो सम्मानित भाई! ख्याल रखिए और जिस से भी मिलिए तो सलाम कीजिए और उनसे मुस्कुरा कर हाथ मिलाइए, इस तरह आप एक ही समय में तीन सुन्नतों पर अमल करेंगे l
अल्लाह सर्वशक्तिमान ने कहा:

 وَقُلْ لِعِبَادِي يَقُولُوا الَّتِي هِيَ أَحْسَنُ إِنَّ الشَّيْطَانَ يَنْزَغُ بَيْنَهُمْ إِنَّ الشَّيْطَانَ كَانَ لِلْإِنْسَانِ عَدُوّاً مُبِينا (الإسراء:53)

 

"मेरे बन्दों से कह दो कि: बात वही कहें जो उत्तम हो lशैतान तो उनके बीच उकसाकर फ़साद डालता रहता है lनिस्संदेह शैतान मनुष्य का प्रत्यक्ष शत्रु है l[बनी-इसराईल: 53]
•   और हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृपाऔर सलाम हो-ने कहा:(अच्छा शब्द एक दान है) इसे बुखारी और मुस्लिम ने उल्लेख किया है l 
•  अच्छा शब्द में क्या क्या बातें शामिल हैं?: इस में अल्लाह के ज़िक्र सहित , दुआ, सलाम किसी की उचित प्रशंसा, अच्छे शिष्टाचार, नैतिकता, भले बर्ताव और अच्छे कार्य सभी शामिल हैं l
अच्छा शब्द का असर: अच्छा शब्द मनुष्य पर जादू का काम करता है, मनुष्य को आराम देता है और उसके दिल को शांति से भर देता है l 
अच्छाशब्द के लाभ: अच्छाशब्द तो एक मोमिन के दिल में छिपे प्रकाश, मार्गदर्शन और सीधे रास्ते पर होने की निशानी है l 
तो मेरे सम्मानित भाई! क्या आपने इस विषय में कभी सोचा कि अपनी पूरी जीवन को सुबह से लेकर शाम तक अच्छे और पवित्र शब्दसे आबाद रखेंगे, क्योंकि आपकी पत्नी आपके बच्चे, आपके पड़ोसी, आपके दोस्त, आपके नौकर और जिस जिस के साथ भी आप बर्ताव करते हैं सब के सब अच्छे शब्द के ज़रूरतमंद और पियासे हैं l




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