पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - न्फ्ल नमाजें घर में पढ़ना



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

न्फ्ल नमाजें घर में पढ़ना:

1 – हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपाऔर सलाम हो-ने कहा: निस्संदेह आदमी की नमाज़ अपने घर में सब से अच्छी है सिवाय फ़र्ज़ नमाज़ के lबुखारी और मुस्लिम दोनों इस पर सहमत हैं l

2 - हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपाऔर सलाम हो-ने कहा: आदमी    की नफ्ल नमाज़ ऐसी जगह पर जहाँ उसे लोग न देखें लोगों की आंखों के सामने उसकी नमाज़ की तुलना में २५ (पचीस) नमाज़ों के बराबर है lइसे अबू-यअला ने उल्लेख किया है और अल्बानी ने इसे सही बताया है l

3 -हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपाऔर सलाम हो-ने कहा:

अपने  घर में आदमी की नमाज़ की गुणवत्ता उसकी तुलना में जाहां  लोग देखते हैं ऐसी ही है जैसे फर्ज़ नमाज़ कीगुणवत्तान्फ्ल पर है lइसे उसे अत-तबरीनी ने उल्लेख किया है और अल्बानी ने इसे विश्वशनीय बताया l

• इस आधार पर रात और दिन में ज़ुहा की नमाज़ (यानी दिन चढ़ने के        समय की नमाज़) और वितर नमाज़ सहित असीम सुन्नतों (यानी ग़ैर-  मुअक्कदा सुन्नतों) की संख्या बहुत होजाती है, और यदि एक व्यक्ति उसे अपने घर में पढ़ने का प्रयास करता है तो उसे बड़ा पुण्य प्राप्त होगा और सुन्नत पर भी अमल हो जाएगा l

 

इन सुन्नतों को घर में पढ़ने के फल:

सुन्नतों को घर में पढ़ने से यह बात स्पष्ट होती है कि श्रद्धालु केवल अल्लाह हीकेलिए श्रद्धा और भक्ति कर रहा है, इसके द्वारा व्यक्ति दिखावे के गुमान से भी दूर रहता हैl

क)      सुन्नतों को घर में पढ़ने से घर में भी दया उतरती है , और शैतान घर से भाग जाता है l

ख)      इस के द्वारा पुण्य की संख्या में भी कई कई गुना बढ़ावा मिलता है जैसे फ़र्ज़ को मस्जिद में पढ़ने से कई गुना बढ़कर पुण्य प्राप्त होता है उसी तरह न्फ्ल को घर में पढ़ने से अधिक पुण्य प्राप्त होता है l




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