1. फोटो एल्बम
  2. (127) तुम धर्म वाली (दीनदार, धार्मिक औरत) को हासिल करो।

(127) तुम धर्म वाली (दीनदार, धार्मिक औरत) को हासिल करो।

121 2020/09/06
(127) तुम धर्म वाली (दीनदार, धार्मिक औरत) को हासिल करो।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ – رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ – أَنَّ رَسُولُ الله صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:

"تُنْكَحُ الْمَرْأَةُ لِأَرْبَعٍ: لِمَالِهَا، وَلِحَسَبِهَا، وَلِجَمَالِهَا، وَلِدِينِهَا، فَاظْفَرْ بِذَاتِ الدِّينِ تَرِبَتْ يَدَاكَ".

तर्जुमा: ह़ज़रत अबू हुरैरा रद़ियल्लाहु अ़न्हु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:

"औरत से चार कारणों की बुनियाद पर विवाह किया जाता है: धन की वजह से, वंश की बुनियाद पर, सुंदरता की काराण और धर्म की वजह से। तो तुम धर्म वाली धर्म वाली (दीनदार, धार्मिक औरत) को हासिल करो। तुम्हारे हाथ मिट्टी में मिलें।"

शादी महत्वपूर्ण मक़सदों में से एक है। क्योंकि इसी से वंश की सुरक्षा है और इसी से अल्लाह की जमीन पर उस तरह से इंसानी पैदावार होती है जैसा के इस सारी दुनिया को पैदा करने वाला अल्लाह तआ़ला अपने बंदों से चाहता है।

मर्द और औरत इस खिलाफत में दोनों एक दूसरे के शरीक हैं और अल्लाह की सीमाओं को स्थापित करने और अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में एक दूसरे के मददगार हैं। इस तौर पर कि उनमें से हर एक दूसरे के लिए उसके लक्ष्य को पूरा करने का सहारा और इस रास्ते में अपनी ताकत के हिसाब से बोझ बर्दाश्त करने में दूसरे का साथी है।

माननीय और महान नसब या वंश को खास तौर पर शादी के मामले में लोगों के बीच बड़ी अहमियत हासिल है। क्योंकि यह दोनों परिवारों के दरमियान एक तराजू है। लिहाज़ा जरूरी है कि दोनों परिवारों में भौतिक और आध्यात्मिक रूप से बराबरी हो। ताकि किसी एक परिवार को किसी तरह का कोई नुकसान न पहुंचे।

बहुत से उ़लमा ए किराम के नजदीक नस्ल या वंश में बराबरी शादी के लिए शर्त है इस तौर की मर्द वंश में औरत की हैसियत का हो। क्योंकि औरत उसी से पहचानी जाती है। लिहाज़ा अगर कोई व्यक्ति किसी अच्छी नस्ल वाली औरत को चाहता हो तो यह अच्छी बात है बशर्ते कि अच्छे वंश के साथ साथ वह औरत दीनदार भी हो ताकि गलतियों में पढ़ने से महफूज रह सके।

इसी वजह से नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:" तो तुम धर्म वाली(दीनदार, धार्मिक औरत) को हासिल करो।" यानी उसे ही अपना लक्ष्य बनाए रखें और वही असली सिद्धान्त होना चाहिए। क्योंकि दीनदार औरत से शादी करने में तुम्हारी भी मदद है और तुम्हारे दीन की भी। क्योंकि दीनदार (धार्मिक) औरत की खूबसूरती उसके अखलाक और उसके अच्छे काम में है। क्योंकि वह ऐसे धर्म को थामे हुए है जो उसकी हिफाज़त करता है। अतः वह धर्म उसे हर एक ऐबदार चीज से महफूज रखता है और हर उस चीज से संवारता है जिससे उसकी खूबसूरती में ज़्यादती होती है। तथा उस दीनदार औरत की सारी दौलत भी उसका धर्म और दीन ही है। क्योंकि वह बरकत वाली होती है। उसकी वजह से अल्लाह कम को बहुत ज्यादा कर देता है। क्योंकि धार्मिक औरत ज़्यादातर थोड़ी चीज पर राजी हो जाती है। और उसके अंदर किसी तरह का लालच नहीं होता कि जिसकी वजह से वह पति से ऐसी चीज मांगे जो वह लाकर नहीं दे सकता। अतः वह खर्च के मामले में संतुलन से काम लेती है। क्योंकि उसके धर्म ने उसे यही सिखाया होता है। लिहाज़ा दीनदार औरत के काम में, उसकी बात में और हालत में बाहरी खूबसूरती भी नजर आती है और अंदरूनी भी।

अत: उसकी बात में सच उसका ज़ैवर होता है। उसके काम में ईमान उसका सिंगार होता है। और उसकी हालत में संतुलन उसकी विशेषता होता है। लिहाज़ा अगर कभी गुस्सा भी करती है तो आपे से बाहर नहीं होती है और न ही उसकी वजह से होश व हवास खोती है।

पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइटIt's a beautiful day