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(142) अल्लाह के ज़िक्र के अलावा बहुत ज़्यादा बोलने से बचो।

114 2020/09/22
(142) अल्लाह के ज़िक्र के अलावा बहुत ज़्यादा बोलने से बचो।

عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ– رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا أَنَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:

"لَا تُكْثِرُوا الْكَلَامَ بِغَيْرِ ذِكْرِ اللَّهِ؛ فَإِنَّ كَثْرَةَالْكَلَامِ بِغَيْرِ ذِكْرِ اللَّهِ تَعَالَى قَسْوَةٌ لِلْقَلْبِ، وَإِنَّ أَبْعَدَ النَّاسِ مِنْ اللَّهِ الْقَلْبُ الْقَاسِي".

तर्जुमा: ह़ज़रत अ़ब्दुल्लह बिन उ़मर रद़ियल्लाहु अ़न्हुमा बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: "अल्लाह के ज़िक्र के अलावा बहुत ज़्यादा बोलने से बचो। क्योंकि अल्लाह के ज़िक्र के अलावा ज़्यादा बात करना दिल को सख्त (कठोर) कर देता है। और बेशक अल्लाह से सबसे दूर कठोर दिल वाला होता है।"

नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम हमें इस ह़दीस़ शरीफ में इस बात की नसीहत फरमा रहे हैं कि हम ऐसी बात न करें जिसमें अल्लाह का ज़िक्र न हो और अगर करें भी तो ज्यादा न करें बल्कि सिर्फ इतनी करें जिससे मकसद पूरा हो जाए। लिहाज़ा सबसे बेहतर बात वह है जिसमें शब्द कम और माना ज़्यादा हों। तथा अक्लमंदी भी कम बोलने में ही है। नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने अल्लाह के ज़िक्र के अलावा ज़्यादा बोलने से मनादी की वजह यह बताई कि इससे दिल सख्त होता है। यानी बिना वजह की बात करने से तबीयत में सख्ती (कठोरता), अखलाक में बुराई और दिल में अंधेरा होता है। और जब दिल में अंधेरा हो जाता है तो वह कठोर (सख्त) हो जाता है और जब दिल कठोर हो जाता है तो वह अपना संतुलन खो बैठता है और नष्ट हो जाता है। ऐसी स्थिति में ऐसे दिल वाला इंसान अल्लाह से सबसे ज़्यादा दूर हो जाता है जिस से बढ़कर कोई बुराई नहीं हो सकती।

नेक लोगों की बातचीत अल्लाह का ज़िक्र हुआ करती है। क्योंकि उसमें बिना वजह की बात नहीं होती है जो नुकसान पहुंचाती है और किसी तरह का फायदा नहीं देती। बल्कि वे लोग तो बिना वजह की बात करने से सबसे ज़्यादा दूर रहते हैं। क्योंकि वह हमेशा अपने आप को  ठीक काम और सही बात में व्यस्त रखते हैं। क्योंकि अगर आप अपने आप को ठीक काम और सही बात में व्यस्त नहीं रखेंगे तो आप गलत काम में पड़ जाएंगे। एक सही़ह़ हदीस पाक में आया है कि: "अल्लाह उस व्यक्ति पर रहम (दया या कृपा) फरमाए जो बोले तो फायदे में रहे या चुप रहे तो बचा रहे।" और एक कहावत भी है कि जो ज़्यादा बोलता है वह गलती भी ज़्यादा करता है।

पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइटIt's a beautiful day