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(143) सात तबाह करने वाले गुनाहों से बचो।

18 2020/09/22
(143) सात तबाह करने वाले गुनाहों से बचो।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ:

"اجْتَنِبُوا السَّبْعَ الْمُوبِقَاتِ" قَالُوا: يَا رَسُولَ اللَّهِ! وَمَا هُنَّ، قَالَ: " الشِّرْكُ بِاللَّهِ وَالسِّحْرُ وَقَتْلُ النَّفْسِ الَّتِي حَرَّمَ اللَّهُ إِلَّا بِالْحَقِّ وَأَكْلُ الرِّبَا وَأَكْلُ مَالِ الْيَتِيمِ وَالتَّوَلِّي يَوْمَ الزَّحْفِ وَقَذْفُ الْمُحْصَنَاتِ الْمُؤْمِنَاتِ الْغَافِلَاتِ".

तर्जुमा: ह़ज़रत अबू हुरैरा रद़ियल्लाहु अ़न्हु बयान करते हैं कि नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:"सात तबाह करने वाले गुनाहों से बचो।" सह़ाबा ए किराम ने पूछा:" ए अल्लाह के रसूल! वे गुनाह क्या हैं?"नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:"अल्लाह के साथ किसी को साझेदार करना (अल्लाह के साथ शिर्क करना), जादू-टोना करना, किसी को नाहक क़त्ल करना कि जिससे अल्लाह ने मना क्या है, सूद खाना, यतीम (अनाथ) का माल खाना,युद्ध से भाग जाना और पवित्र व भोली-भाली मुसलमान महिलाओं पर (गुनाह की) तोहमत लगाना।"

यह वसियत लगभग हर उस बुराई को शामिल है जिससे रुकना चाहिए और जिसके करीब नहीं जाना चाहिए। अल्लाह के साथ शिर्क करना सबसे बड़ा गुनाह है और तमाम बुराइयों को शामिल है बल्कि वह बुराई पर बुराई है। फिर इसके बाद जिक्र होने वाली चीजों की बुराई का नंबर आता है।

नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम की यह महान आदत थी कि आप अपने भाषण में कुछ भलाईयों का जिक्र करते जिनके करने का हुक्म देते और कुछ बुराइयों का ज़िक्र करते जिनसे बचने का आदेश देते जैसे कि आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम फरमाते हैं:

سَبْعَةٌ يُظِلُّهُمْ اللَّهُ فِي ظِلِّهِ يَوْمَ لَا ظِلَّ إِلَّا ظِلُّهُ...".

तर्जुमा: सात लोगों को अल्लाह उस दिन अपनी कृपा की छांव में रखेगा जिस दिन सिवाय उसकी कृपा की छांव के कोई ओर छांव न होगी।"

एक दुसरी जगह नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:

 "أَرْبَعٌ مَنْ كُنَّ فِيهِ كَانَ مُنَافِقًا خَالِصًا..."

     तर्जुमा:"जिसमें चार आदतें हों वह पक्का मुनाफिक (दो रुखा) है।"

और यहाँ पर इरशाद फ़रमाते हैं: "सात तबाह करने वाले गुनाहों से बचो।" तबाह करने वाले केवल सात ही गुनाह नहीं हैं लेकिन यहाँ पर आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने सात ही का जिक्र फरमाया ताकि ये आसानी के साथ याद हो जाएं।

इस वसियत पर पहली नजर पड़ते ही यह पता चल जाता है कि शिर्क के बाद जो चीजें बयान हुई हैं उनमें गुनाह की तरतीब का ख्याल नहीं रखा गया है उदाहरण के लिए जब शिर्क के बाद जिक्र होने वाले गुनाह पर नजर करेंगे तो आपको लगेगा कि यह बाद में आने वाला गुनाह से ज्यादा बड़ा गुनाह है लेकिन जब उसके बाद वाले को देखेंगे तो आप कहेंगे कि यह पहले वाले से बड़ा गुनाह है। और इसी तरह बाकी गुनाहों में भी यही बात है। और सच यह है कि इन गुनाहों में से हर एक अलग अलग एतबार से अपने सामने वाले गुनाह से बड़ा गुनाह है लेकिन इकट्ठा तौर पर शिर्क के बाद सभी एक जैसे गुनाह और बुराई हैं। नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम के फरमान: "बचो।" का मतलब यह है कि पूरी सावधानी रखो। और दुनिया और आखिरत में तबाह और बर्बाद कर देने वाले गुनाहों से अपने आप को दूर रखो। क्योंकि जैसा कि हमें मालूम है दुनिया में भी अ़ज़ाब होता है और आखिरत में भी होगा। और आखिरत का अ़ज़ाब ही बड़ा है।

सर्वशक्तिमान अल्लाह पाक के साथ किसी को शरीक करना यानी साझेदार ठहराना बहुत ही बड़ी आफत और बहुत बड़ा गुनाह है जो कभी माफ नहीं किया जाएगा। अल्लाह ऐसे किसी भी पुरुष या महिला का कोई कार्य कुबूल नहीं करेगा। क्योंकि कार्य के सही होने और उसके कुबूल होने के लिए शुद्ध ईमान का होना जरूरी है।

इस वसियत में दूसरा हलाक कर देने वाला गुनाह जिससे से बचने का नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने आदेश दिया है जादू-टोना करना है। यह भले ही कुफ्र नहीं है लेकिन उससे कम भी नहीं है। जादूगरों को आखिरत में अल्लाह की कृपा नसीब नहीं होगी बल्कि उन्हें तो उनके फसाद की वजह से अ़ज़ाब (सज़ा) पर अ़ज़ाब दिया जाएगा। फिरऔ़न की कॉम एक प्रकार का जादू जानती थी जिसे बाबूली नहीं जानते थे। तो अल्लाह ने अपने नबी ह़ज़रत मूसा को ऐसा चमत्कार व करिश्मा दिया जिसके द्वारा उन्होंने फिरऔ़न की कॉम की साज़िशों और चालों को मिट्टी में मिला दिया।

जादूगर का हुक्म यह है कि अगर लोगों को इससे परेशानी पहुंचे तो उससे तौबा करने को कहा जाए। अगर तौबा कर ले और अपनी मक्कारी से बाज आ जाए तो उसे अल्लाह के फैसले पर छोड़ दिया जाए। और अल्लाह ही बेहतरीन फैसला करने वाला है। और अगर तौबा न करे तो उसे क़त्ल कर दिया जाए। मुसलमान को चाहिए कि वह तमाम जादूगरों से दूर है। और उनसे कोई संबंध न रखे। और न ही उन लोगों के पास जाए जो यह दावा करते हैं कि उनका जिन्नों से संपर्क है। वे उन्हें अप्रकट (गुप्त, अनदेखी) चीजें बताते हैं। उनाका काम करते हैं। जो वे उनसे मांगें उसे पूरा करते हैं। गायब (अनुपस्थित) व्यक्ति को सामने ला देते हैं। वगेरह वगेरह झूठे दावे करते हैं।

और न ही फाल निकालने वाले के पास जाए जो सितारों को देखकर कंकरियों वगैरह से फाल खोलता है जिसे कोई सही बुद्धि स्वीकार नहीं कर सकती।

तीसरा हलाक कर देने वाला गुनाह किसी को नाहक क़त्ल करना है। यह उन तमाम गुनाहों से बुरा गुनाह है जो एक इंसान अपने इंसान ही भाई के हक में करता है। तो कौन सी जमीन उसे स्वीकार करेगी करेगी और कौन सा आसमान उसे छांव देगा जो बिना जमीर के अपने इंसान भाई को नाहक क़त्ल कर देता है। क़ाबिल और हाबिल की कहानी में अल्लाह ने क़त्ल को बहुत बढ़ा जुर्म व पाप बताया है। अतः इस कहानी के आखिर में अल्लाह फरमाता है:

مِنْ أَجْلِ ذَلِكَ كَتَبْنَا عَلَى بَنِي إِسْرَائِيلَ أَنَّهُ مَنْ قَتَلَ نَفْسًا بِغَيْرِ نَفْسٍ أَوْ فَسَادٍ فِي الْأَرْضِ فَكَأَنَّمَا قَتَلَ النَّاسَ جَمِيعًا وَمَنْ أَحْيَاهَا فَكَأَنَّمَا أَحْيَا النَّاسَ جَمِيعًا.

(सूरह: अल-माइदह, आयत संख्या: 32)

तर्जुमा: इस वजह से हमने बनी इस्राइल पर लिख दिया कि जिसने बगैर जान के बदले कोई जान क़त्ल की या जमीन में फसाद किए तो गोया उसने सब लोगों को क़त्ल किया। और जिसने एक जान को जिला लिया उसने गोया सब लोगों को जला लिया।" (तर्जुमा: कंज़ुलईमान)

अत:एक जान के क़त्ल करने को सब लोगों का क़त्ल करना बताया गया ताकि यह पता चल सके कि नाहक क़त्ल करना कितना बड़ा जुर्म व पाप है।

नाहक क़त्ल करने का सबसे गंभीर रूप यह है कि कोई व्यक्ति फकीरी के डर से अपनी औलाद या शर्म की वजह से अपनी बेटी को कत्ल करदे जैसा कि जाहिली जमाने में अरब के कुछ लोग किया करते थे। और उससे भी बड़ा जुर्म यह है कि अल्लाह की तक़दीर (भाग्य) से तंग व परेशान और उसकी कृपा या रहमत से मायूस होकर इंसान खुदकुशी करले।

चौथा हलाक करने वाला गुना सूद खाना है। यह इंसान को दुनिया और आखिरत में तबाह करने वाला सबसे बड़ा गुनाह है। अल्लाह ने सूद खाने वालों की कयामत के दिन की स्थिति बयान की है जिससे दिल दहल जाते हैं। अल्लाह फरमाता है:

الَّذِينَ يَأْكُلُونَ الرِّبَا لَا يَقُومُونَ إِلَّا كَمَا يَقُومُ الَّذِي يَتَخَبَّطُهُ الشَّيْطَانُ مِنَ الْمَسِّ.

(सूरह: अल-बक़रह, आयत संख्या:275)

    तर्जुमा: "वे जो सूद खाते हैं कयामत के दिन न खड़े होंगे मगर जैसे खड़ा होता है वह जिसे आसैब ने छूकर पागल कर दिया हो।" (तर्जुमा: कंज़ुलईमान)

लिहाजा बहुत ज्यादा डर और होलनाकी के कारण वे अपनी क़बरों से पागलों की तरह उठेंगे और उनके पेट उनके आगे होंगे जैसे उह़द का पहाड़ जैसे कि कुछ ह़दीस़ों आया है।

सूदखोर मूर्ख इंसान है। क्योंकि वह समझता है कि सूद लेने में बहुत ज्यादा फायदा है कि वह अपना माल किसी को इस शर्त पर कर्ज देता है कि वह उससे ज्यादा उसे वापस देगा हालांकि हकीकत में यह बहुत बड़ा नुकसान और घटा है। क्योंकि किसी न किसी तरह वह हराम का माल चला ही जाता है और अगर बाकी रहे तो न उसे फायदा देता है और न ही उसके मरने के बाद उसके वारिसों को। अगर यह व्यक्ति अकलमंद होता तो जरूर यह जान लेता की भलाई (बिना सूद के) अच्छा कर्ज देने में ही है। क्योंकि वह यह एक ऐसा महान सदका़ है जिससे अल्लाह की नाराजगी दूर होती है और जिससे उस व्यक्ति को दुनिया और आखिर में फायदा पहुंचता है। लेकिन सूद के साथ क़र्ज़ देने में ऐसा नहीं है। क्योंकि उसमें सिर्फ नुकसान ही नुकसान है।

सूद का लेनदेन करना एक तो बहुत बड़ा गुनाह है जैसा कि हमने ऊपर बयान किया। तथा इसमें माल की बर्बादी भी है जिसे पैदावार बढ़ाने और मजदूरों को देने में इस्तेमाल करना चाहिए जिसमें की बहुत बड़ा फायदा है।

पांचवाँ तबाह कर देने वाला गुनाह अनाथ का माल खाना है। इसमें भी सूद खाने से कम गुनाह नहीं है बल्कि ये तो उससे भी बड़ा गुनाह है। क्योंकि अल्लाह ने इस पर सख्त चेतावनी दी है। अल्लाह फरमाता है:

إِنَّ الَّذِينَ يَأْكُلُونَ أَمْوَالَ الْيَتَامَىٰ ظُلْمًا إِنَّمَا يَأْكُلُونَ فِي بُطُونِهِمْ نَارًا وَسَيَصْلَوْنَ سَعِيرًا.

(सूरह: अल-निसाअ, आयत संख्या: 10)

तर्जुमा: "वह जो यह अनाथों का माल नाहक खाते हैं वह तो अपने पेटों में निरी आग भरते हैं और कोई दम जाता है कि वे भड़कती आग में झुलसाए जाएंगे।"

तो पता चला कि अनाथ का माल एक आग है जो भी उसकी तरफ खयानत का हाथ बढ़ाता है उसे जलाकर रख देता है या जमीन में धंसा देता है। लिहाजा जो उसे नाहक खाएगा दुनिया में भी चलेगा और आखिरत में भी जहन्नम की आग में झुलसाया जाएगा। और ताकि कोई इसका खबीस गुनाह को करने की कोशिश न करे इसलिए अल्लाह ने इस चेतावनी से पहले एक ओर चेतावनी दी। अतः अल्लाह ने ऊपर बयान की हुई आयत से पहले फरमाया:

وَلْيَخْشَ الَّذِينَ لَوْ تَرَكُوا مِنْ خَلْفِهِمْ ذُرِّيَّةً ضِعَافًا خَافُوا عَلَيْهِمْ فَلْيَتَّقُوا اللَّهَ وَلْيَقُولُوا قَوْلًا سَدِيدًا

(सूरह: अल-निसाअ, आयत संख्या: 9)

तर्जुमा: "और डरें वे लोग अपने बाद कमजोर औलाद छोड़ते तो उनका कैसा उन्हें खतरा होता। तो चाहिए कि अल्लाह से डरें और सीधी बात करें।" (तर्जुमा: कंज़ुलईमान) तो चाहिए कि वे अल्लाह के अधिकार का ख्याल रखें। अपने मातहत अनाथों के अधिकार में अल्लाह से डरें, उनकी और उनकी सम्पत्ति की सुरक्षा करें और उनके साथ ऐसा व्यवहार करें जैसा कि वे अपने बच्चों के साथ चाहते हैं।

अनाथों का माल खाने से सबसे ज्यादा अल्लाह से डरने वाले सह़ाबा ए किराम रद़ियल्लाहु अ़न्हुम थे खासकर उनका नाहक माल खाने के बारे में आयत उतरने के बाद।

यतीम के साथ सबसे बेहतरीन भलाई और नेकी यह है कि उसकी अच्छी तरह से देखभाल की जाए यहाँ तक कि अच्छी तरह से उसमें अपने मामले संभालने की क्षमता हो जाए। यही अमानत अल्लाह ने अनाथों के जिम्मेदारों के कंधों पर रखी है। लिहाज़ा अगर इसमें कोताही करेंगे तो उसी के हिसाब से उन्हें अल्लाह के सामने उसका जवाब देना होगा।

छटा हलाक कर देने वाला गुनाह मैदान-ए-जंग (युद्ध के मैदान) से भाग जाना है। यह एक बड़ा गुनाह है जबकि इससे मुसलमानों के समूह से जा मिलकर सहायता मांगना या पीछे हटकर दुश्मन को फांसना और उसको हराना मकसूद न हो।

युद्ध के मैदान में डटे रहना एक बड़ी जिम्मेदारी है और यह मोमिन के लिए एक सम्मान और अल्लाह के साथ उसके सच होने के सबूत है। जबकि युद्ध का मैदान छोड़कर भाग जाने में बुजदिली, जिल्लत व रुसवाई, मुसलमानों को तकलीफ देना और उनके साथ विश्वासघात करना है। क्योंकि इससे उनमें फूट पड़ेगी, उनकी हिम्मत टूटेगी और दुश्मन को डटे रह जाने वाले मुसलमानों पर हमला करने की हिम्मत मिलेगी। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि भागने वालों पर ही भागने का बवाल आ गिरता है। और कभी-कभार तो इसकी वजह से वह बड़ी बुरी तरह मारे जाते हैं। और बुजदिलों की मौत मरते हैं जिनका दुनिया में कोई चर्चा नहीं रहता। और आखिरत में भी उन्हें लानत और जहन्नुम के अ़ज़ाब के अलावा कुछ नहीं मिलने वाला।

युद्ध के मैदान में सबसे ज्यादा डटे रहकर लड़ने वाले नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम वाले के सह़ाबा ए किराम रद़ियल्लाहु अ़न्हुम थे। शहादत पाना उनकी आरजू और बड़ी सफलता थी। क्योंकि वह शहादत के सम्मान और मर्तबा और उसके सवाब को अच्छी तरह जानते थे। उनका नारा था कि मौत की आरजू करो ताकि ताकि तुम्हें हमेशा का जीवन नसीब हो।

सातवाँ तबाह कर देने वाला गुना पवित्र महिलाओं पर तोहमत लगाना है। यह भी बहुत बड़ा और खतरनाक जुर्म है। और इस्लामी समाज जो कि अच्छे अखलाक और बेहतरीन व्यवहार में दुसरे सभी समाजों में अलग हैसियत रखता है उसके लिए यह गुनाह सबसे ज्यादा नुकसान दे और हानिकारक है। क़ुरआन पाक में पवित्र महिलाओं पर तोहमत लगाने के बारे में अल्लाह का फरमान है:

إِنَّ الَّذِينَ يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ الْغَافِلَاتِ الْمُؤْمِنَاتِ لُعِنُوا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ

(सूरह: नूर, आयत संख्या: 23)

तर्जुमा: "बेशक वे जो एब लगाते हैं अनजान पवित्र ईमान वालियों को उन पर लानत है दुनिया और आखिरत में। और उनके लिए बड़ा अ़ज़ाब है।" (तर्जुमा: कंज़ुलईमान)

पवित्र औरतें यानी साफ-सुथरी महिलाएं। एब लगाने का मतलब उन पर बदकारी व ज़िना की तोहमत लगाना है जबकि वे उससे बरी और कोसों दूर हों। तोहमत लगाने वाले लोगों पर लानत होने का मतलब है कि दुनिया और आखिरत में वे अल्लाह की रहमत से दूर रहेंगे। लिहाजा इसमें उन लोगों के लिए सबक है जो लोगों की इज्जत से खिलवाड़ करते हैं। और मुस्लिम समाज में बुराई फैलाना पसंद करते हैं।

पवित्र पुरुषों पर तोहमत लगाना भी पवित्र महिलाओं पर तोहमत लगाने ही की तरह है। लेकिन इस ह़दीस़ शरीफ में खासतौर पर पवित औरतों पर तोहमत लगाने के बारे में आया है। उसकी वजह यह है कि पुरुषों के प्रति महिलाओं पर ज्यादा तोहमत लगाई जाती है। और यह ज्यादा नुकसान दे और हानिकारक है। तथा इसका ज्यादा बुरा अंजाम है। क्योंकि औरतों के बारे में जो कहा जाता है उससे उसे भी तकलीफ होती है, उसके पति, बच्चों और परिवार वालों को भी तकलीफ होती है। लेकिन मर्द का मामला ऐसा नहीं है जैसा कि यह जाहिर है इसके बताने की जरूरत नहीं। ज़िना (बदकारी) की तोहमत लगाना गुनाह में ज़िना करने की तरह है। इसी वजह से उसकी सजा कोड़े लगाना है।

इस महान वसियत ने हमें भलाई और हिदायत का रास्ता दिखाया, बुराइयों के स्थानों को बताया तथा मुख़्तसर तौर पर सभी बुरी विशेषताओं से खबर दार कर दिया। क्योंकि यह सात तबाह करने वाली आफतें साभी बड़े गुनाहों और बुरी आदतों की जड़ हैं। लिहाज़ा जो इन से सुरक्षित रहेगा वह उन सभी आफतों से सुरक्षित रहेगा जो दिलों को बूरा कर देती हैं, उन की चमक खत्म कर देती हैं, अच्छे अखलाक और बेहतरीन व्यवहारों का खात्मा कर देती हैं और नेक कामों को तबाह व बर्बाद कर देती हैं।

 

पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइटIt's a beautiful day