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(152) जब तुम में से कोई लम्बे समय तक घर से गायब रहे (यानी कहीं यात्रा पर चला जाए) तो वह अचानक रात को घर न आए।

207 2020/10/03
(152) जब तुम में से कोई लम्बे समय तक घर से गायब रहे (यानी कहीं यात्रा पर चला जाए) तो वह अचानक रात को घर न आए।

عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ:

"إِذَا أَطَالَ أَحَدُكُمُ الْغَيْبَةَ فَلَا يَطْرُقْ أَهْلَهُ لَيْلًا".

तर्जुमा: ह़ज़रत जाबिर रद़ियल्लाहु अ़न्हु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:" जब तुम में से कोई लम्बे समय तक घर से गायब रहे (यानी कहीं यात्रा पर चला जाए) तो वह अचानक रात को घर न आए।"

और एक दूसरी रिवायत में है कि नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने फरमाया:

 إِذَا قَدِمَ أَحَدُكُمْ لَيْلًا فَلَا يَأْتِيَنَّ أَهْلَهُ طُرُوقًا، حَتَّى تَسْتَحِدَّ الْمُغِيبَةُ وَتَمْتَشِطَ الشَّعِثَةُ".

तर्जुमा: जब तुम में से कोई रात के समय घर वापस आए तो अचानक घर में दाखिल न हो। (बल्कि इतना इंतजार करे) कि वह औरत जिसका पति गायब हो अपने शरीर के फालतू बाल साफ करले। और बिखरे बालों वाली औरत अपने बालों में कंघी करले।"

और एक रिवायत यह है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इससे मना किया कि इंसान रात को अचानक अपने घर वालों के पास जा पहुंचे ताकि उनकी ख्यानत पकड़े या गल्तियाँ ढूंडे।

इस्लामी शरीयत बेहतरीन जिंदगी के लिए एक मुकम्मल संविधान है जिसमें हर एक ऐसी छोटी बड़ी चीज मौजूद है जिसकी इंसान को अपनी जिंदगी में जरूरत पड़ सकती है यहाँ तक कि वह इंसान के विशेष मामलों को भी शामिल है। लिहाज़ा वह उसकी हर ऐसी चीज की तरफ रहनुमाई करती है जो उसके, उसके परिवार और सारे समाज के लिए बेहतर हो। तथा वह उसे हर मामले में अच्छा समाधान देती है। यहाँ तक कि इस इस्लामी शरीयत की सम्पूर्णता और बारीकी और अच्छे अखलाक से इसके मिलाप को देखकर यहूदी, ईसाई और दूसरे गैर मुस्लिम लोग भी ताज्जुब करते थे यहाँ तक कि उनमें से एक व्यक्ति ने ह़ज़रत सलमान फारसी रद़ियल्लाहु अ़न्हु से कह दिया: "तुम्हारे नबी ने तुम्हें सब कुछ सिखा दिया यहाँ तक कि पाखाना करने का तरीका भी!.… "

यह वसियत बहुत ही सादा और छोटी है लेकिन इसमें ऐसे काम की वसियत है जिसकी लोग परवाह नहीं करते और जिसे कोई अहमियत नहीं देते हैं हालांकि यह बहुत महत्वपूर्ण और अहम काम है।

नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम का इरशाद:" जब तुम में से कोई लंबे समय तक घर से दूर रहे" इस बात को बता रहा है कि "रात को घर अचानक न आने" का आदेश उसी व्यक्ति के लिए है जो लंबे समय से गायब हो यानी यात्रा आदि पर हो। न कि ऐसे व्यक्ति के लिए जिसकी किसी भी समय आने की उम्मीद हो और रात-दिन उसके आने का इंतजार हो रहा हो और पत्नी जानती हो कि वह ज़्यादातर किस समय आता है। लिहाज़ा ऐसे में वह उसके आने तक तैयार रहेगी, अपने आप को संवारे रखेगी और उसके सामने बुरी स्थिति में नहीं आएगी। लेकिन फिर भी ऐसे व्यक्ति के लिए ज्यादा मुनासिब यही है कि किसी भी तरह अपने आने से पहले ही अपने परिवार वालों को अपने आने की खबर करदे भले ही दरवाजे ही से करे। ताकि उसके घर वाले बेहतरीन सूरत में उसका स्वागत करें। लेकिन हाँ जो लंबे समय तक घर से गायब हो उसके लिए मुनासिब है कि अचानक घर का दरवाजा न खटखटाए खासकर रात के समय में। क्योंकि उसके घरवालों को तकलीफ होगी। उन्हें खुशी कम होगी। वे उसका सही से स्वागत नहीं कर सकेंगे और अगर घर में वह कोई गैर मुनासिब चीज देखेगा या पत्नी को ऐसी स्थिति में देखेगा जिसकी उसे आदत न थी तो उससे उन्हें हर्ज होगा और पत्नी को भी तकलीफ होगी।

लिहाज़ा इसी बुनियाद पर हम यह कह सकते हैं कि दिन में भी आने से पहले खबर कर देना और बता देना मुस्ताहब यानी बेहतर है।

लेकिन हाँ अगर कोई जरूरत हो तो लंबे समय से गायब रहने वाला व्यक्ति भी रात को अचानक घर आ सकता है।

पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइटIt's a beautiful day