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(155) शांति और सुकून का ख्याल रखो।

117 2020/10/03
(155) शांति और सुकून का ख्याल रखो।

عَنْ أَبِي قَتَادَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ:

" بَيْنَمَا نَحْنُ نُصَلِّي مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ سَمِعَ جَلَبَةَ رِجَالٍ فَلَمَّا صَلَّى قَالَ: مَا شَأْنُكُمْ؟ قَالُوا: اسْتَعْجَلْنَا إِلَى الصَّلَاةِ، قَالَ: فَلَا تَفْعَلُوا إِذَا أَتَيْتُمْ الصَّلَاةَ فَعَلَيْكُمْ بِالسَّكِينَةِ، فَمَا أَدْرَكْتُمْ فَصَلُّوا، وَمَا فَاتَكُمْ فَأَتِمُّوا".

तर्जुमा: ह़ज़रत अबू क़तादह रद़ियल्लाहु अ़न्हु बयान करते हैं:"हम नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम के साथ नमाज़ पढ़ रहे थे कि आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने कुछ लोगों के चलने-फिरने की आवाज सुनी। नमाज़ के बाद आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने पूछा: "क्या मामला था?" लोगों ने कहा कि हम नमाज़ के लिए जल्दी कर रहे थे। आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने फ़रमाया :"ऐसा न किया करो। बल्कि जब तुम नमाज़ के लिए आओ तो वकार और शांति का ख्याल रखो। (जमात की) जो नमाज़ तुम्हें मिल जाए उसे पढ़ लो और जो रह जाए उसे बाद में पूरा कर लो।"

सह़ाबा ए किराम रद़ियल्लाहु अ़न्हुम मस्जिद में आकर नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम के पीछे ध्यान व लगाओ के साथ नमाज़ अदा करने के सबसे ज्यादा ख्वाहिशमंद रहते थे। लिहाज़ा अगर वे पीछे रह जाते और नमाज़ खड़ी हो जाती तो एक दूसरे से जल्दी करते हुए उसकी तरफ तेजी से दौड़कर आते। लेकिन नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने ऐसा करने से मना कर दिया। क्योंकि नमाज़ की बुनियाद ध्यान व लगाओ पर है और पूरा ध्यान व लगाओ सुकून और शांति पर आधारित है जिसका हर मुसलमान को अपनी सभी इबादतों में खासकर नमाज़ में ख्याल रखना चाहिए।

तथा नमाज़ का भी सम्मान है। मस्जिद का भी सम्मान है। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम का भी सम्मान है। और जो इमाम नमाज़ पढ़ा रहा है उसका भी सम्मान है। तथा जो लोग नमाज़ पढ़ रहे हैं उनका भी ध्यान नमाज़ से नहीं भटकना चाहिए। लिहाज़ा इन तमाम चीजों को देखते हुए यह आदेश है कि जो जमात की नमाज़ से पीछे रह जाए वह दरमियानी चाल चलते हुए नमाज़ की तरफ आए और न तेज़ी करे और न ही सुस्ती करे।

और जो यह चाहता हो कि उसकी गिनती नेकियों में जल्दी करने वाले लोगों में हो तो उसे चाहिए कि वह अज़ान से पहले ही नमाज़ के लिए रवाना हो जाए।

नमाज़ अदा करना अपने आप और शैतान के साथ जिहाद करना है। लिहाज़ा जिसने अपने आप और शैतान के साथ जिहाद कर लिया तो दुनिया में भी उसके लिए सवाब है और आखिरत में भी। और अल्लाह ही के पास बेहतरीन सवाब है।

पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइटIt's a beautiful day