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(169) ऐ मेरे भाई! अपनी दुआ़ में हमें न भूल जाना।

87 2020/10/04
(169) ऐ मेरे भाई! अपनी दुआ़ में हमें न भूल जाना।

عَنْ عُمَرَ بِنْ الخطاب رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ:

"اسْتَأْذَنْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الْعُمْرَةِ فَأَذِنَ لِي، وَقَالَ: "لَا تَنْسَنَا يَا أُخَيَّ مِنْ دُعَائِكَ".فَقَالَ كَلِمَةً مَا يَسُرُّنِي أَنَّ لِي بِهَا الدُّنْيَا. وفِي رواية قَالَ: "أَشْرِكْنَا يَا أُخَيَّ فِي دُعَائِكَ".

तर्जुमा: ह़ज़रत उ़मर बिन खत़्त़ाब रद़ियल्लाहु अ़न्हु बयान कहते हैं: "मैंने नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम से उ़मरह पर जाने की इजाजत मांगी। तो आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने मुझे इजाजत दे दी और इरशाद फ़रमाया:" मेरे भाई! अपनी दुआ़ में हमें न भूल जाना।" ह़ज़रत उ़मर कहते हैं कि नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम के फरमान (से मुझे इतनी खुशी हुई कि इसके) बदले अगर मुझे पूरी दुनिया भी दे दी जाए तब भी मुझे इतनी खुशी न हो।

एक दुसरी रिवायत में है कि नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: "ऐ मेरे भाई! हमें भी अपनी दुआ़ओं में शामिल कर लेना।"

नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम के सह़ाबा ए किराम रद़ियल्लाहु अ़न्हुम अपने सभी मामलों में आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम से मशवरा करते थे जबकि उनके पास उस मामले में क़ुरआन या ह़दीस़ शरीफ से कोई रहनुमाई नहीं होती। तो आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम उन्हें उनके मामलों में सही रास्ता बताते। तो जब भी कोई यात्रा का इरादा करता तो आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम से सलाह लेता। इसी तरह जब भी कोई विवाह का इरादा करता तो आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम से उसके बारे में पूछता ताकि आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम उसकी सही रहनुमाई करें या उसके लिए बरकत की दुआ़ करें।

देखें किस तरह से नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम के सह़ाबा ए किराम रद़ियल्लाहु अ़न्हुम नबी का अदब और एहतराम करते थे। और इसका कारण था आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम का उनके दिलों में सम्मान, आपकी इज्ज़त, आपसे मोहब्बत का एलान, आपकी राय का अदब और सम्मान, आपकी नसीहत का इंतजार और आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम का उनकी ऐसी रहनुमाई करना जिसमें उनकी दुनिया और आखिरत की भलाई हो।

लिहाज़ा ह़ज़रत उ़मर बिन खत़्त़ाब रद़ियल्लाहु अ़न्हु नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम के पास उ़मरह की इजाजत लेने के लिए आते हैं। वह उ़मर बिन खत़्त़ाब जो ह़ज़रत अबू बक्र रद़ियल्लाहु अ़न्हुमा के बाद आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम को सबसे ज्यादा प्यारे थे। ताकि आप उन्हें इस मामले में कुछ  सलाह दें या धर्म व दुनिया में फायदेमंद नसीहत करें या उनके लिए बरकत व भलाई की दुआ़ करें जैसा कि आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम सभी सह़ाबा ए किराम रद़ियल्लाहु अ़न्हुम के साथ करते थे। अतः आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने उनके लिए दुआ़ की और विदाई के समय पर ऐसा शब्द फरमाया जो उन्हें सारी दुनिया और उसकी तमाम चीजों से ज्यादा पसंद आया। अतः आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने उन्हें उम्र को विदा करते समय फरमाया:"मेरे भाई! अपनी दुआ़ में हमें न भूल जाना।" यह ऐसा शब्द है जिसमें नरमी व कोमलता कूट-कूट कर भरी हुई है तथा यह एक ऐसा विदाई शब्द है जो ऐसी वसियत को शामिल है जिसमें उनके लिए दीन और दुनिया की भलाई है।

इस ह़दीस़ शरीफ से यह भी लिया जाता है कि नबी ए करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि सल्लम बहुत ज्यादा मेहरबान और दयालु थे। अपने सह़ाबा के साथ इस तरह जिंदगी बसर करते थे जो प्यार और मोहब्बत से भरी हुई थी जिसकी बुनियाद सादगी पर थी। किसी तरह का कुछ तकल्लुफ न था। न उन पर नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम बुलंदी जाहिर करते। न ही उनसे अलग-थलग दिखना पसंद करते। न कोई ऐसा काम करते जिसकी वजह से उन्हें आप से डर लगे या बात करने में हिचकिचाहट हो। उनके साथ घुलमिल जाने और उनकी हालतें जानने से कभी नहीं कतराते थे। तथा उनकी जरूरतों को पूरा करने और उनकी ऐसी पसंदीदा चीजों को बाकी रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे जो शरीयत के मुवाफिक हों और बुद्धिमान लोगों और सही रिवाज में मकबूल हों।

लिहाज़ा हमें भी चाहिए कि हम में से हर एक अपने मुसलमान भाई से अपने लिए दुआ़ को कहे। क्योंकि पीठ पीछे एक मुसलमान भाई की दूसरे मुसलमान भाई के लिए दुआ़ रद्द नहीं होती है। लिहाज़ा इंशाअल्लाह उसकी दुआ़ जरूर कबूल होगी।

पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइटIt's a beautiful day