इशा (रात) की नमाज़

-इशा की नमाज़ के लिए 20 मिनट पहले पहुँच जाना चाहिए और इस समय को शुभ क़ुरआन को पढ़ने में लगाना चाहिए l और शुभ क़ुरआन का वही भाग पढ़ना अच्छा है जो तरावीह में पढ़ा जाएगा (याद रहे कि तरावीह एक बीस रकअत की विशेष नमाज़ जो शुभ रमज़ान में इशा की नमाज़ के बाद पढ़ी जाती है l) और भावुक आयतों को दुहरा दुहरा कर पढ़ें इस से तरावीह की नमाज़ में आपका दिल लगेगा l

-आज़ान के शब्दों को दुहराना चाहिए l

-अज़ान और इक़ामत के बीच दुआ करनी चाहिए l
- फिर इशा की नमाज़ अदा करनी चाहिए l इमाम मुस्लिम की पुस्तक में हज़रत उस्मान बिन अफ्फान-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे- के द्वारा कथित है उन्होंने हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो- को फरमाते सुना :

"من صلى العشاء في جماعة فكأنما قام نصف الليل، ومن صلى الصبح في جماعة فكأنما صلى الليل كله".

(जिसने इशा की नमाज़ जमाअत के साथ पढ़ी तो वह ऐसा है जैसे आधी रात तक नमाज़ पढ़ी और जिसने फज्र की नमाज़ जमाअत से पढ़ी तो ऐसा है जैसे पूरी रात नमाज़ पढ़ी l)

-नमाज़ के बाद की दुआ और ज़िक्र पढ़ना चाहिए l

-इशा की नमाज़ के बादवाली दो रकअत सुन्नत पढ़नी चाहिए l
-इशा की नमाज़ के बाद इमाम के साथ तरावीह की नमाज़ अदा करनी चाहिए l क्योंकि शुभ हदीस में है:

"من قام مع الإمام حتى ينصرف كتب له قيام ليلة"

(जो इमाम के साथ नमाज़ (तरावीह) पढ़े यहाँ तक कि वह वापिस लौटें तो उसके लिए रात भर नमाज़ लिखी जाएगीl) इसलिए आपका प्रयास यही रहना चाहिए कि इस हदीस के अनुसार पूरी रात नमाज़ पढ़ने का पुरस्कार आपको मिले और इमाम के तरावीह खत्म करने से पहले आप वापिस न हों l