पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - नींद से जागने की सुन्नतें



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   


नींद से जागने की सुन्नतें:

१- चेहरे पर से सोने के असर को हाथ से खत्म करना: इमाम नववी और इब्ने-हजर ने इसे पसन्दीदा बात बताया है क्योंकि इस विषय में एक हदीस आई है कि: अल्लाह के पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो- नींद से उठे और अपने हाथ से अपने चेहरे पर से नींद के चिन्हों को पोछने लगे. इसे इमाम मुस्लिम ने उल्लेख किया है.

२ – यह दुआ पढ़ना भी सुन्नत है:
( الحمد لله الذي أحيانا بعدما أماتنا وإليه النشور )
(अल-हमदुल्लाहिल लज़ी अहयाना बादमा अमातना व इलैहिन-नुशूर)
 परमेश्वर का शुक्र है, कि उसने हमें मौत देने के बाद फिर से जीवित किया, और उसी की ओर लौटना है. इसे इमाम बुखारी ने उल्लेख किया है.


 ३- मिस्वाक या (दातून) : (अल्लाह के पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो-जब रात में जागते थे तो मिस्वाक से अपने दांत को घंसते थे.  इमाम बुखारी और मुस्लिम इस पर सहमत हैं.


उस के कारण:
१ – इसकी विशेषताओं में यह भी शामिल है कि चुस्ती और फुर्ती पैदा होती है.
२ - और मुंह का गंध खत्म होता है.




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