पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - अज़ान की सुन्नतें



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   


अज़ान की सुन्नतें:

अज़ान की सुन्नतें पांच हैं जैसा कि इब्ने-क़य्यिम ने "ज़ादुल-मआद" में उल्लेख किया है:

१ – सुनने वाले को भी वही शब्द दुहराना है जो आज़ान देने वाला आज़ान में कहता है. लेकिन "हय्या अलस-सलाह"(नमाज़ की ओर आओ) और हय्या अलल-फलाह"(सफलता की ओर आओ) में "ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह" (न कोई शक्ति है और न कोई बल है मगर अल्लाह ही से.) पढ़ना चाहिए. इसे बुखारी और मुस्लिम ने उल्लेख किया है.

 


* इस सुन्नत के फल: इस का लाभ यह है कि  स्वर्ग आपके लिए निश्चित हो जाएगा, जैसा कि इमाम मुस्लिम की "सहीह" नामक पुस्तक में साबित है.

२ –और आज़ान सुनने वाले को यह पढ़ना चाहिए:
(وأنا أشهد ألا إله إلا الله ، وأن محمداً رسول الله ، رضيت بالله رباً ، وبالإسلام ديناً ، وبمحمد رسولاً)
:"व अना अशहदु अल्लाइलाहा इल्लल्लाहु, वह अशहदु आन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह, रज़ीतु बिल्लाहि रब्बा, व बिलइस्लामि दीना, व बिमुहम्मादिन रसूला" मतलब मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह को छोड़ कर कोई पूजे जाने के योग्य नहीं है और मुहम्मद अल्लाह के पैग़म्बर हैं, मैं संतुष्ट हूँ अल्लाह के पालनहार होने से, और इस्लाम के धर्म होने से और मुहम्मद के दूत होने से.) इसे इमाम मुस्लिम ने उल्लेख किया है.

 


* इस सुन्नत पर अमल के फल: इस सुन्नत पर अमल करने से पाप माफ कर दिए जाते हैं. जैसा कि खुद इस हदीस में उल्लेखित है.
३ – अज़ान का जवाब देने के बाद हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो-पर सलाम भेजना चाहिए, और सब से अधिक पूर्ण सलाम तो" इबराहीमी दरूद" ही है, इस से अधिक पूर्ण तो और कोई दरूद है नहीं.
• इसका सबूत: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो-का यह फरमान है कि: जब तुम अज़ान देने वाले को सुनो तो वैसा ही कहो जैसा वह कहता है, फिर मुझ पर दरूद भेजो, क्योंकि जो मुझ पर एक बार दरूद पढ़ता है तो उसके बदले में अल्लाह उस पर दस दया उतारता है. इसे इमाम मुस्लिम ने उल्लेख किया है.

 


 * इस सुन्नत पर अमल करने के फल: इसका सब से बड़ा फल तो यही है कि खुद अल्लाह अपने भक्त पर दस दरूद भेजता है.
* अल्लाह के दरूद भेजने का मतलब: अल्लाह के दरूद भेजने का मतलब यह है कि वह फरिश्तों की दुनिया में उसकी चर्चा करता है. 


 दरूदे इबराहीमी के शब्द यह हैं:
(اللهم صل على محمد وعلى آل محمد كما صليت على إبراهيم وعلى آل إبراهيم إنك حميد مجيد ، اللهم بارك على محمد وعلى آل محمد كما باركت على إبراهيم وعـلى آل إبراهيـم إنك حميد مجيد.)
(अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मद, व अला आलि मुहम्मद, कमा सल्लैता अला इबराहीमा व अला आलि इबराहीमा इन्नका हमिदुम-मजीद, अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मद, व अला आलि मुहम्मद, कमा बारकता अला इबराहीमा व अला आलि इबराहीमा इन्नका हमिदुम-मजीद.)


" हे अल्लाह! मुहम्मद और उनके बालबच्चों पर दरूद और दया उतार, जैसे तू ने हज़रत इबराहीम और उनके बालबच्चों पर उतारा, और तू मुहम्मद और उनके बालबच्चों पर बरकत उतार जैसे तू ने हज़रत इबराहीम और उनके बालबच्चों पर बरकत उतारी." इसे इमाम बुखारी ने उल्लेख किया है.

 

 

४ – उनपर दरूद पढ़ लेने के बाद यह दुआ पढ़े:
(اللهم رب هذه الدعوة التامة والصلاة القائمة آت محمداً الوسيلة والفضيلة ، وابعثه مقاماً محموداً الذي وعدته(
अल्लाहुम्मा रब्बा हाज़िहिद- दअवतित-ताम्मति वस-सलातिल-क़ाइमा, आति मुहम्मदन अल-वसीलता वल- फज़ीला, वबअसहू मक़ामम-महमूदन अल-लज़ी वअदतहू.
 हे अल्लाह! इस पूर्ण बुलावे और स्थापित नमाज़ के मालिक! हज़रत मुहम्मद को "वसीला" नमक दर्जा और उदारता दे, और उन्हें "मक़ामे-महमूद"(सराहनीय दर्जा) दे.
* इस दुआ का फल: जिसने यह दुआ पढ़ी उसके लिए हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो-की सिफारिश निश्चित हो गई. 

 


५ - उसके बाद अपने लिए दुआ करे, और अल्लाह से उसका इनाम मांगे, क्योंकि उस समय दुआ स्वीकार होती है, हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो- ने कहा है: अज़ान देने वाले जो कहते हैं वही तुम भी कहो,  और जब खत्म कर लो, तो मांगो मिलेगा.
इसे अबू-दाऊद ने उल्लेख किया है, और हफिज़ इब्ने-हजर ने इसे विश्वसनीय बताया, और इब्ने-हिब्बान ने इसे सही कहा है.
* उन सुन्नतों की संख्या कुल पचीस है जो अज़ान सुनने से संबंधित हैं, और जिन पर अज़ान सुनने के समय अमल करना चाहिए.

 




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