पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - फज्र की सुन्नत



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

फज्र की सुन्नत:
इसकी कुछ विशेष सुन्नतें हैं :

१ – इसे संक्षिप्त रूप से पढ़ना: क्योंकि हज़रत आइशा-अल्लाह उनसे खुश रहे- ने कहा: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो- सुबह की नमाज़ की आज़ान और इक़ामत के बीच दो संक्षिप्त रकअतें पढ़ते थे. इमाम बुखारी और मुस्लिम इस पर सहमत हैं.  
२ – इन दोनों रकअतों में क्या पढ़ना चाहिए?
हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो-सुबह की नमाज़ की पहली रकअत में  सूरह अल-बक़रा की आयत नंबर १३६ पढ़ते थे, आयत का शुरू इस तरह है:
(قُولُوا آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنْزِلَ إِلَيْنَا)(البقرة136)

  कहो :" हम ईमान लाए अल्लाह पर और उस बात पर जो हमारी ओर उतारी गई." (अल-बक़रा:१३६)
और एक बयान के अनुसार दूसरी रकअत में सूरह आले-इमरान की आयत नंबर ५२ पढ़ते थे, आयत इस तरह है:
(آمَنَّا بِاللَّهِ وَاشْهَدْ بِأَنَّا مُسْلِمُونَ ) (آل عمران:52(
"हम अल्लाह पर ईमान लाए और गवाह रहिए कि हम मुस्लिम हैं"(आले-इमरान:५२)
और उसकी दूसरी रकअत में यह आयत पढ़ते थे:
قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ تَعَالَوْا إِلَى كَلِمَةٍ سَوَاءٍ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُم) (آل عمران:64)) 
कहो:"ऐ किताबवाले! आओ एक ऐसी बात की ओर जिसे हमारे और तुम्हारे बीच समान मान्यंता प्राप्त है."(आले-इमरान:६४) इसे इमाम मुस्लिम ने उल्लेख किया है.
* एक अन्य बयान में है कि फजर की दो रकअत में" क़ुल या ऐययुहल-काफिरून" और " क़ुल हु वल्लाहु अहद" पढ़े. इसे इमाम मुस्लिम ने उल्लेख किया है.
 


३ – लेटना : क्योंकि हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो- जब फजर की दो रकअत पढ़ लेते थे तो अपने दाहिने पहलू पर लेटते थे. इसे इमाम बुखारी ने उल्लेख किया हैं. 
जब आप अपने घर में फजर की दो रकअत पढ़ लेते हैं तो उसके बाद कुछ सेकंड के लिए ही सही लेटये, ताकि सुन्नत पर अमल होजाए. 
 




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