ऐसी न्फ्ल नमाज़ें जो दिन और रात में पढ़ी जात&

ऐसी न्फ्ल नमाज़ें जो दिन और रात में पढ़ी जाती हैं:

१ – निश्चित सुन्नतें या सुन्नते-मुअक्कदा: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो-ने कहा:जो भी मुसलमान व्यक्ति अल्लाह सर्वशक्तिमान के लिए फ़र्ज़ के सिवाय बारह रकअत न्फ्ल पढ़ता है तो अल्लाह उसके लिए स्वर्ग में एक घर का निर्माण कर देता है,या उसके लिए स्वर्ग में एक घर का निर्माण कर दिया जाता है.) इसे इमाम मुस्लिम ने उल्लेख किया.


* यह सुन्नतें इस तरह हैं: चार रकअत ज़ुहर से पहले और दो रकअत उसके बाद, और दो रकअत मग़रिब के बाद और दो रकअत इशा के बाद और दो रकअत फ़जर से पहले.
* प्रिय भाई! क्या आपको स्वर्ग में एक घर पाने की इच्छा नहीं है? हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो- के इस सलाह का ख्याल रखें, और फ़र्ज़ के इलावा बारह रकअत पढ़ना न भूलें.

ज़ुहा की नमाज़ या दिन चढ़ने के समय की नमाज़ : ज़ुहा की नमाज़ ३६० दान के बराबर है, क्योंकि मानव शरीर में ३६० हड्डी या जोड़ हैं, और प्रत्येक दिन हर हड्डी या हर अंग के जोड़ के बदले में एक दान दान करने की ज़रूरत है, ताकि इस उदारता के लिए धन्यवाद हो सके, लेकिन इन सब की ओर से ज़ुहा की दो रकअत नमाज़ काफी हो जाती है.


इन दोनों रकअत के फल: जैसा कि इमाम मुस्लिम की "सहीह" नामक पुस्तक में उल्लेखित है, हज़रत अबू-ज़र्र से सुनी गई है कि हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो-ने बताया कि: (तुम में से किसी भी व्यक्ति पर प्रत्येक अंग के जोड़ की ओर से एक दान करना है, अल्लाह की पवित्रता को बयान करना भी एक दान है, और अच्छी बात का आदेश देना भी एक दान है, और किसी बुराई से रोकना भी एक दान है, और इन सब के लिए जो ज़ुहा की दो रकअत पढ़े ले तो यह काफ़ी है. इस हदीस में एक अरबी शब्द "सुलामा"
"سلامى"


आया है उसका अर्थ है: जोड़ यानी मानव शरीर के अंगों का जोड़.
और हज़रत अबू-हुरैरा-अल्लाह उनसे खुश रहे- के द्वारा उल्लेख की गई कि उन्होंने कहा: मुझे मेरे यार -उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो-ने प्रत्येक महीने में तीन दिन रोज़े रखने का, और ज़ुहा की दो रकअत पढ़ने का आदेश दिया, और यह कि सोने से पहले वितर की नमाज़ पढूं. इमाम बुखारी और मुस्लिम इस पर सहमत हैं.
इस नमाज़ का समय: इस नमाज़ का समय सूर्य के निकलने के पंद्रहव मिंट के बाद से शुरू होता है और ज़ुहर की नमाज़ का समय आने से पंद्रहव मिंट पहले समाप्त होता है.
इस नमाज़ को पढ़ने का सब से अच्छा समय: सूरज की गर्मी के तेज़ होने के समय इस को पढ़ना अधिक अच्छा है.
इस नमाज़ की रकअतों की संख्या: कम से कम उसकी संख्या दो रकअत है.

उसके अधिकांश की संख्या: अधिक से अधिक उसकी रकअतों की संख्या आठ हैं, लेकिन यह भी कहा गया है कि उसके अधिकांश की कोई सीमा नहीं है.
२- ज़ुहर की सुन्नत: ज़ुहर से पहले पढ़ी जाने वाली निश्चित सुन्नत चार रकअत है, जबकि ज़ुहर के बाद पढ़ी जाने वाली सुन्नत दो रकअत है, जो ज़ुहर के फ़र्ज़ नमाज़ के बाद पढ़ी जाती है.


३ –असर की सुन्नत: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो-ने कहा: (अल्लाह आदमी पर दया करे जो असर से पहले चार रकअत पढ़े) अबू-दाऊद और तिरमिज़ी ने इसे उल्लेख किया है.
४ – मग़रिब की सुन्नत : हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो-ने कहा: (मग़रिब से पहले नमाज़ पढ़ो, तीसरी बार में उन्होंने कहा: जो पढ़ना चाहे.) इसे बुखारी ने उल्लेख किया.

५ –इशा की सुन्नत: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृपा और सलाम हो-ने कहा: (प्रत्येक दो आज़ान के बीच एक नमाज़ है, प्रत्येक दो आज़ान के बीच एक नमाज़ है, प्रत्येक दो आज़ान के बीच एक नमाज़ है, और तीसरी बार में कहा: जो पढ़ना चाहे.) इमाम बुखारी और मुस्लिम इस पर सहमत हैं.
* इमाम नववी ने कहा: दो आज़ान का मतलब आज़ान और इक़ामत है.

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