पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - दोनों हाथों को उठाना और उस का तरीक़ा



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

दोनों हाथों को उठाना और उस का तरीक़ाः

33- नमाज़ी तकबीर कहने के साथ ही, या उस से पहले, या उसके बाद अपने दोनों हाथों को उठाये, ये सभी विधियाँ सुन्नत से साबित हैं।

34- वह अपने दोनों हाथों को इस तरह उठाये कि उन की अंगुलियाँ फैली हुई हों।

35- और अपनी दोनों हथेलियों को अपने दोनों मोंढों के बराबर तक ले जाये, और कभी कभी उन दोनों को उठाने में मुबालगा करे यहाँ तक कि उन्हें दोनों कानों के किनारों के बराबर तक ले जाये। (मैं कहता हूँ किः जहाँ तक अपने दोनों अंगूठों से अपने दोनों कानों की लौ को छूने का संबंध है तो सुन्नत में इस का कोई आधार नहीं है, बल्कि वह मेरे नज़दीक वस्वसे के कारणों में से है)




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