पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- क



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

 

हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- की अपनी पत्नियों के प्रति वफादारी

पैगंबरहज़रतमुहम्मद-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- अपनी पत्नियों के प्रति बेहद वफादार थे, विशेष रूप से हज़रत खदीजा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे- के साथ, उनकी तो हज़रत खदीजा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे- के साथ इतनी ज़ियादा वफादारी थी कि हज़रत आइशा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे- को उनपर डाह होने लगा, हालांकि हज़रत आइशा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे- उनको कभी देखी भी नहीं थी और न हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो-के घर में एक साथ शादी में रहीं थी (उनका तो बहुत पहले निधन हो चुका था) , हज़रत आइशा कहती हैं:

१- मुझे कभी हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- की किसी पत्नी पर उतना जलन नहीं हुआ जितना कि हज़रत खदीजा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे- पर हुआ, क्योंकि हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- उनको बहुत याद करते थे और उनकी बहुत बड़ाई करते थे, और हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- को ईशवाणी आई थी कि उनको स्वर्ग में एक सोने से बने घर की खुशखबरी दे दें lयह हदीस हज़रत आइशा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे-के द्वारा कथित की गई , और यह हदीस सही है, इसे इमाम बुखारी ने उल्लेख किया है, देखिए बुखारी शरीफ पेज नंबर या संख्या: ५२२९l

२- पैगंबर हज़रत मुहम्मद -उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- की अपनी पत्नियों के प्रति वफादारी उस शुभ आयत से भी स्पष्ट होती है जिस में उनको यह इख्तियार दिया गया था कि जिनको चाहें रखें और यदि छोड़ना चाहें तो छोड़ दें lअल्लाह सर्वशक्तिमान का फरमान है:

( يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّأَزْوَاجِكَ إِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا وَزِينَتَهَا فَتَعَالَيْنَ أُمَتِّعْكُنَّ وَأُسَرِّحْكُنَّ سَرَاحاً جَمِيلاً  ) ( الأحزاب: 28 )

(ऐ नबी! अपनी पलियों से कह दीजिए कि "यदि तुम सांसारिक जीवन और उसकी शोभा चाहती हो तो आओ , मैं तुम्हें कुछ दे-दिलाकर भली रीति से विदा कर दूँ l(अल अहज़ाब: 28)

हज़रत आइशा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे-कहती हैं कि जब हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- को पत्नियों को रखने या छोड़ने के विषय में इख्तियार दिया गया तो सब से पहले उन्होंने मुझ से शुरू किया और कहा: "मैं तुम से एक बात कहने जा रहा हूँ देखो तुम जल्दी न करना अपने माता पिता के साथ चर्चा कर लेना, और उन्हें पता था कि मेरे माता पिता तो उनसे जुदा होने का हुक्म देने वाले नहीं , आगे हज़रत आइशा कहती हैं : फिर उन्होंने उपर उल्लेखित आयत को पढ़ा , तो मैं बोली: इस में अपने माता पिता से मुझे पूछने की क्या ज़रूरत? मैं तो अल्लाह और उसके दूत को चाहती हूँ l

यह हदीस हज़रत आइशा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे-के द्वारा कथित की गई , और यह हदीस सही है, इसे इमाम बुखारी ने उल्लेख किया है, देखिए बुखारी शरीफ पेज नंबर या संख्या: ४७८५l

यहां यह डर था और हो सकता था कि अपनी कमउम्री के कारण सांसारिक सुखों को पाने की इच्छा प्रकट कर दें , और दुनिया और आखिरत की बहुत सारी भलाइयों को खो बैठें , लेकिन वह अपनी भलाई का अपने माता पिता से भी अधिक ख्याल करने वाली निकलीं , इस लिए वह हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- को साफ़ साफ़ बोल दीं: क्या इस बारे में मैं अपने मातापिता से पूछने जाऊँगी ? मैं तो अल्लाह, उसके दूत और आखिरत को चाहती हूँ l

इसके बाद हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो-अपनी पवित्र पत्नियों के घरों को जा जा कर यह बात बताने लगे और उनको कहने लगे: आइशा ऐसा ऐसा कही तो वे सब बोलीं: हम भी वही कहते हैं जो आइशा कहती हैं lहज़रत आइशा-अल्लाह उनसे प्रसन्न रहे- पहले ही हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- को बोल रखी थी कि आप अपनी पत्नियों को यह न बताएं कि मैं आपको चुनी हूँ , तो हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- ने फरमाया: अल्लाह सर्वशक्तिमान ने मुझे पहुंचानेवाला बना कर भेजा है न कि मनमानी करने वालाl

यह हादीस हज़रत अय्यूब से कथित है, और विश्वसनीय है, इसे अल्बानी ने उल्लेख किया है, देखिए 'सहीह तिरमिज़ी' हदीस नम्बर ३३१८ l

वे सब के सब अल्लाह, उसके पैगंबर और आखिरत को चुनीं, इस से पता चलता है कि उनकी सारी पत्नियां ईशवाणी जिस घर में उतरता था उस घर के तौर तरीक़े और शिष्टाचार पर चलती थीं, इसलिए वे भी अपने अपने लिए वही चुनीं जो हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- चुन रखे थे कि थोड़ी मोड़ी और काम चलाव दुनिया बस है और फिर आखिरत असल है, वास्तव में वे सब के सब हज़रत पैगंबर-उन पर ईश्वर की कृपा और सलाम हो- की महान शिष्टाचार से प्रभावित थीं जिनके कमाल और ऊँचाई का क्या कहना !l




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