अल्लाह ने हर वस्तु पर एहसान को अनिवार्य व फर्ज़ कर दिया है।

Article translated to : اردو العربية English

ह़ज़रत अबु यअ़ला शद्दाद बिन औ़स (अल्लाह उनसे राज़ी हो) से रिवायत है वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम) से रिवायत करते हैं कि उन्होंने फरमाया : "अल्लाह ने हर वस्तु पर एहसान को अनिवार्य व फर्ज़ कर दिया है। अतः जब तुम क़त्ल करो, तो ठीक तरीक़े से क़त्ल करो, जब ज़बह करो तो ठीक तरीक़े से ज़बह करो तथा तुममें से एक व्यक्ति को चाहिए कि अपनी छुरी तेज़ कर ले और अपने जानवर को आराम पहुँचाये।" (मुस्लिम)

इस्लामी क़ानून में एहसान का नियम बुनियादी नियम है जिस पर सभी नियम और नैतिक सिद्धांत आधारित हैं, और यह न्याय व इन्साफ, भलाई, वफा और दया से जुड़ा है। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम) ने इस महान वसीयत के द्वारा मोमिनों के साथ अपनी बात शुरू की जो कि मनुष्य के हर कार्य में एहसान करने के लिए एक महान उदाहरण है, अगरचे दिखने में उस कार्य में बेरहमी और कठोरता हो।

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम) के यह कहने से कि :" अल्लाह ने हर वस्तु पर एहसान को अनिवार्य व फर्ज़ कर दिया है।" पता चलता है कि एहसान एक ऐसा मामला है कि अल्लाह ने उसे सारी मखलूक़ पर लिख दिया है और उसे हर मुकल्लफ व्यक्ति पर अनिवार्य (फर्ज ) विशेषता या उससे कम में आवश्यक किया है।

Previous article Next article

Articles in the same category