पैगंबर मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम) सहनशीलता के व्यक्ति थे

बुरे प्रचार और झूठे आरोप और दावे जिन में थोड़ी भी इ़लमी ईमानदारी नहीं है, और जिस ने पैगंबर मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की हक़ीक़त भ्रष्ट करदी कि वह एक ऐसे सरदार और लीडर थे जो सहनशीलता का विरोध करते थे, अन्यथा वास्तव में पैगंबर मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम) जीवन के सभी कार्यो में सहनशीलता के आमंत्रणकर्ता थे, उनका व्यावहारिक जीवन महान सहनशीलता के उदाहरणों से भरा है, उनमें से एक यह कि कुछ यहूदी मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम )की मृत्यु के लिए प्रार्थना करते थे, और उन्हें यह वहम दिलाते थे कि वे उनका स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि वे उनसे: "अस्सलामु अ़लैकुम "(अर्थ: तुम पर सलामती और शान्ति हो) कहने की बजाय (अस्सामु अ़लैकुम) कहते थे, जिसका अर्थ है "  तुम पर मृत्यु हो ", पैगंबर मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम ) उनके इस बुरे इरादे को समझ गये लेकिन पैगंबर मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम) महान सहनशीलता वाले व्यक्ति थे, ज़रा सोचो कि अगर उनकी जगह आप होते तो क्या करते और आपकी क्या प्रतिक्रिया होती ? मैं पैगंबर मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम ) की प्रतिक्रिया आपको बाद में बताउंगा, आप कल्पना करें कि आप एक ऐसे शासक या राजा हैं जिसकी प्रजा उसकी आज्ञाकारी है या आप आज्ञा देने वाले लीडर और नैता हैं, और फिर कोई व्यक्ति आपके लिए मृत्यु की प्रार्थना करे और इससे भी बदतर यह कि वह आपको धोखा देता है और आपको यह बात पता चल जाये, तो हो सकता है कि आप अपनी मृत्यु के लिए उसकी प्रार्थना में उसे क्षमा कर दें लेकिन आप उसके धोखे को माफ नहीं कर सकते।


न्यायपूर्ण पाठक! अब में तुम्हें ऐसी नाजुक हालत में पैगंबर मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम ) की प्रतिक्रिया बताता हूँ ताकि तुम अपने आप ही फैसला करो, तो सूनो, एक दिन पैगंबर मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम ) अपनी पत्नी ह़ज़रत आ़एशा के साथ बैठे हुए थे, तभी कुछ यहूदी आपके पास से गुज़रे, और उन्हें अपमानित करने और गाली देने के  लिए उन्हें सलाम करने का नाटक किया लेकिन उनकी प्यारी पत्नी ने उनके शब्दों के बारे में उनके धोखे को समझ लिया और उन्हीं जैसे अपमानजनक शब्दों के साथ उन लोगों को जवाब दिया।


लेकिन अब प्रशन यह है कि क्या पैगंबर मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम) इस जवाब से संतुष्ट और सहमत थे? क्या वह इस बात से प्रसन्न हुए कि उनकी पत्नी ने उन्हें अपमानित करने वालों को अभिशाप दिया?

उत्तर : नहीं, वह अपनी पत्नी के इस तरह के जवाब देने से सहमत और प्रसन्न नहीं थे, बल्कि उन्होंने अपनी प्यारी पत्नी को चेतावनी देते हुए उन्हें सहनशीलता और कोमलता का आदेश दिया और हिंसा और कठोरता से मना किया।

ह़ज़रत आ़एशा से उल्लेख है वह, कहती हैं :

यहूदी नबी को सलाम करते थे तो :"अस्सामु अ़लैकुम " कहते थे( जिसका अर्थ है "तुम पर मृत्यु हो") आ़एशा (पैगंबर मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम)  की पत्नी ) ने उनकी यह बात समझ ली और जवाब दिया:" मौत और अभिशाप तुम पर हो " तो नबी (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम ) ने फरमाया : रुको आ़एशा! "अल्लाह को सभी कामों में कोमलता प्यारी है "(मुस्लिम)

 

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