पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - दोनों हाथों को रखने का बयान और उस का तरीक़ा



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

दोनों हाथों को रखने का बयान और उस का तरीक़ाः

36- फिर तकबीर कहने के बाद ही (नमाज़ी) अपने दाहिनें हाथ को बायें हाथ पर रख ले, और यह पैगंबरों (उन पर अल्लाह की दया औऱ शांति अवतरित हो) की सुन्नत है और अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम को इस का आदेश दिया है, अतः दोनों हाथों को लटकाये रखना जाइज़ नहीं है।

37- और वह दायें हाथ को अपने बायें हाथ की हथेली की पीठ पर, और कलाई और बाज़ू पर रखे।

38- और कभी कभी अपने दायें हाथ से बायें हाथ को पकड़ ले। किन्तु जहाँ तक इस बात का संबंध है कि बाद के कुछ उलमा (विद्वानों) ने एक ही समय में एक साथ हाथ को रखने और मुट्ठी से पकड़ने को श्रेष्ठ कहा है, तो इस का कोई आधार नहीं है।




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