पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - खुशू व ख़ुज़ू और सजदह की जगह पर देखना



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

खुशू व ख़ुज़ू और सजदह की जगह पर देखनाः

41- नमाज़ी के लिए ज़रूरी है कि अपनी नमाज़ को खुशू (नम्रता और विनय) के साथ अदा करे और उस से ग़ाफिल कर देने वाली सभी चीजों जैसे श्रृंगार और बेल बूटे से दूर रहे, अतः ऐसे खाने की मौजूदगी में नमाज़ न पढ़े जिसे खाने की वह खाहिश रखता है, और न ही ऐसी अवस्था में नमाज़ पढ़े कि उसे पेशाब या पाखाना की सख्त हाजत हो।

42- और अपने क़ियाम (खड़े होने) की हालत में अपने सजदह करने की जगह पर निगाह रखे।

43- और वह नमाज़ मे इधर उधर (दायें और बायें) न मुड़े, क्योंकि इधर उधर मुड़ना एक प्रकार का झपटना है जिसे शैतान बन्दे की नमाज़ से झपट लेता है।

44- और नमाज़ी के लिए अपनी निगाह को आसमान की तरफ उठाना जाइज़ नहीं है।




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