पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - अरकान को बराबर करने का बयान



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

अरकान को बराबर करने का बयानः

78- सुन्नत का तरीक़ा यह है कि नमाज़ी सभी अरकान के बीच लम्बाई में बराबरी करे, चुनाँचे अपने रुकू, रुकू के बाद अपने क़ियाम, तथा अपने सज्दे और दोनों सज्दों के बीच बैठक को तक़रीबन बराबर रखे।

79- तथा रुकू और सज्दा में कुर्आन की तिलावत करना जाइज़ नहीं है।




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