(29) उन्तीसवीं वसियत: शादी के अगले दिन महमानों को सलाम करे और उनके लिए दुआ़ करे

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शादी के अगले दिन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने एक पति को जिन चीज़ों की वसियत की है उनमें से एक यह है कि वह अपने महमानों का स्वागत करे उन्हें सलाम करे और उनके लिए भलाई की दुआ़ करे।

ह़ज़रत अनस बिन मालिक - रद़ीयल्लाहु अ़न्हु - से वर्णित है वह कहते हैं : जब अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने ह़ज़रत ज़ैनब से शादी की तो वलीमा (शादी के अगले दिन महमानों और दूसरे लोगों दावत करके खाना खिलाने को वलीमा कहते हैं ) कराया और मुसलमानों को पेट भर रोटी और गोश्त खिलाया। फिर शादी में अपनी आदत के अनुसार आप मोमिनों की माओं (यानी आप नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम की पत्तियां) के घर गए, आपने उनको सलाम किया, उन्होंने आपको सलाम किया और आपके लिए दुआ़ की।([1])

अत: पति अपने घर के आंगन या महमानों के स्वागत करने की जगह बैठे। जो महमान आएं उनका स्वागत करे। उन्हें अच्छे से अच्छा खाने या फ़ल दे।

अत: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम की कितनी महान वसियतें हैं जिनसे लोगों के बीच मोहब्बत, प्यार और प्रेम फैलता है।

 

 



([1]) यह ह़दीस़ सही़ह़ है। इसे इब्ने सअद ने त़बक़ात अल कुबरा में उल्लेख किया है। (8/107)

 

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