(13) तेरहवीं वसियत: पत्नी के सिर पर हाथ रखकर उसके लिए दुआ़ करना

जब पति अपनी पत्नी के पास जाए तो सम्भोग और शरीरिक संबंध करने से पहले उसके लिए सुन्नत यह है कि वह अपनी पत्नी सिर के सामने के भाग (पेशानी) पर अपना दायाँ हाथ रख कर बिस्मिल्लाह पढ़े और फिर उसके लिए बरकत और आसानी की दुआ़ करे जैसा कि ह़दीस़ शरीफ में आया है।

आइये हम सभ मिलकर इस बारे में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम की वसियत सुनते हैं, आप सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने फ़रमाया : " जब तुम में से कोई किसी महिला से विवाह करे या गुलाम खरीदे तो यह कहे :

उच्चारण: अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका खैरहा व खैरा मा जबल्तहा अलैहि, व अऊज़ो बिक मिन शर्रिहा व मिन शर्रे मा जबल्तहा अलैहि।

अर्थ: "ऐ अल्लाह, मैं तुझसे इसकी भलाई और वह भलाई मांगता हूँ जिस पर तू ने इसे पैदा किया है, तथा मैं इसकी बुराई और उस बुराई से तेरे शरण में आता हूँ जिस पर तू ने इसे पैदा किया है। और जब ऊंट खरीदे तो ऊंट के कूबड़ को पकड़कर यह कहे।।"

और एक दुसरी रिवायत में है: " फिर उसके सिर के सामने के भाग (पेशानी) को पकड़े, और पत्नी और गुलाम में बरकत की दुआ़ करे। "

 



([1])  यह ह़दीस़ ह़सन है, इमाम बुखारी ने “ बन्दों कार्यों की पैदा करने ” के बारे में, (पृष्ठ:77) अबु दाऊद ने (2160), इब्ने माजह ने (1918), निसई ने  “ रात व दिन के कार्य ” (240) में, इमाम ह़ाकिम ने (2/180), इब्ने सिन्नी ने “ रात व दिन के कार्य ” (600) में, त़िबरानी ने (940)(1308) “अल दुआ़ ” में और इमाम बग़वी ने " शरह़ुस्सुन्नह " (1329) में इसे उल्लेख किया है।

 

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