मुह़म्मद (सल्लल्ललाहु अलैहि व सल्लम) अपने आप के साथ

वह एक महान व्यक्ति थे, उन्होंने महानता को बनाया महानता ने उन्हें नहीं, उन्होंने अपने सिद्धांत पर अपने आत्मविश्वास और दृढ़ता( स्थिरता) के माध्यम से अपनी महानता का निर्माण किया,वह अपने दुश्मनों और दोस्तों सभी लोगों के साथ अच्छे व्यवहार,उच्च नैतिकता,कोमलता ,विनम्रता और सरलता से मिलते थे, तथा उसके अलावा भी जटिलता, दिखावा, ढोंग और अहंकार से दूर उनके महान गुण थे।

वह अपने  आप के साथ निष्कपट, ईमानदार और अपने सिद्धांत से संतुष्ट थे, उनके विशिष्ट लक्ष्य और स्पष्ट दृष्टि थे, वह अपने सिद्धांतों पर का़यम रहे यहां तक कि उन्होंने दिव्य संदेश लोगों तक पहुंचा दिया और अपने  उन सभी महान सिद्धांतों को फैला दिया जिन्हें अधिक वे लोग नहीं जानते हैं जो उनसे घृणा करते हैं और उनका अपमान करते हैं।

उनके अन्दर वे सभी अच्छे गुण थे जिन्हें अच्छी प्रकृति चाहती है और वह मानव पूर्णता की  उन सभी विशेषताओं के मालिक थे जिनकी बुद्धिमान इच्छा करते हैं। जन्मजात सुन्दरता को नैतिक और मानसिक  सुन्दरता के साथ मिलाया गया ताकि एक शिक्षक बन सका जिसने दुनिया को सूर्य के समान अंधकार से जगाया और मानव जाति को दोबारा जीवित किया जिसे अज्ञानता और स्वार्थपरता ने मार दिया था।

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