पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - दुआउल इस्तिफ्ताह (नमाज़ को आरंभ करने की दुआ



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

दुआउल इस्तिफ्ताह (नमाज़ को आरंभ करने की दुआः)

45- फिर नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से साबित दुआओं में से किसी दुआ से नमाज़ का आरंभ करे, और ये बहुत अधिक हैं और उन में से सब से मशहूर यह दुआ हैः "सुब्हानकल्लाहु व बि-हमदिका, व तबारकस्मुका व तआला जद्दुका" (अल्लाह, तू पाक है और हम तेरी प्रशंसा करते हैं, तेरा नाम बड़ी बर्कत वाला (बहुत शुभ) औ तेरी महिमा (शान) सर्वोच्च है, तथा तेरे अलावा कोई सच्चा पूज्य नहीं). इस दुआ को पढ़ने का (नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से) हुक्म साबित है, अतः इस की पाबंदी करना उचित है। (और जो आदमी शेष दुआओं की जानकारी चाहता है तो वह किताब "सिफतुस्सलात" पेज न0 91-95, मुद्रण मकतबतुल मआरिफ रियाज़, का अध्ययन करे)।




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