पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - क़िराअत को बुलन्द और धीमी आवाज़ में करने का &



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

क़िराअत को बुलन्द और धीमी आवाज़ में करने का बयानः

64- सुबह (फज्र) की नमाज़, तथा जुमुआ, ईदैन (ईदुल फित्र और ईदुल अज़्हा) और सलातुल इस्तिस्क़ा (बारिश मांगने की नमाज़), कुसूफ (सूर्य या चाँद ग्रहण) की नमाज़ और इसी प्रकार मग़रिब और इशा की पहली दो रकअतों में किराअत बुलन्द आवाज़ से करेंगे।

तथा जुहर और अस्र की नमाज़ में, और इसी प्रकार मग़रिब की तीसरी रकअत में तथा इशा की अंतिम दोनों रकअतों में क़िराअत धीमी आवाज़ से करेंगे।

65- इमाम के लिए कभी कभार सिर्री नमाज़ में मुक़तदियों को आयत सुनाना जाइज़ है।

66- जहाँ तक वित्र और रात की नमाज़ (तहज्जुद) का संबंध है, तो उन में कभी धीमी आवाज़ से क़िराअत करेंगे और कभी तेज़ आवाज़ से और आवाज़ को ऊँची करने में बीच का रास्ता अपनायें गे।




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