(28) अठ्ठाईसवीं वसियत: अगर कोई माहवारी में सम्भोग करले तो उसे कफ़्फ़ारा देने की वसियत।

मेरी मुस्लिम बहनों!

इस्लाम ने मासिक धर्म यानी माहवारी में पत्नी से योनि में संभोग करने को मना किया। कई कारणों, रहस्यों व राज़ों और लोगों के लाभों व फायदों के लिए अगर वे जान लें तो।

लेकिन अगर किसी ने माहवारी के दौरान अपनी पत्नी  से योनि में संभोग कर लिया तो वह उसके प्रायश्चित के लिए क्या करना चाहिए? आइये देखते हैं।

ह़ज़रत इब्ने अ़ब्बास - रद़ीयल्लाहु अ़न्हुमा - से उस आदमी के बारे में जो अपनी औरत से उसकी माहवारी के दौरान संभोग करता है, वर्णित है वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया : “वह एक या आधा दीनार दान करे।” ([1])

इसी ह़दीस़ शरीफ से कई विद्वानों ने ऐसे व्यक्ति के लिए कफ़्फ़ारा देना अनिवार्य व वाजिब कहा है। उनमें से क़तादह, औज़ाई़, अह़मद बिन ह़ंबल, इसह़ाक़ बिन राहवइह, अ़ता़ और इमाम शाफई़ हैं। लेकिन इमाम शाफई़ ने बाद में यह कहा : उस पर कोई चीज़ (अनिवार्य व वाजिब ) नहीं है।

और ख़त्ता़बी ने कहा है: इसमें (यानी माहवारी में संभोग करने में) कफ़्फ़ारा (अनिवार्य) हो इसमें कोई हर्ज की बात नहीं है। क्योंकि यह भी नाजायज़ तरीके से संभोग करना है जैसा कि रमज़ान (के रोज़े ) में। लेकिन अधिक विद्वानों ने यह कहा है कि ऐसे व्यक्ति पर कोई चीज़ (अनिवार्य व ज़रूरी) नहीं है। वह अल्लाह से इस्तिग़फ़ार करे। (यानी क्षमायाचना करे या क्षमा चाहे।) और उन्होंने समझा है कि यह ह़दीस़ मुरसल है या ह़ज़रत इब्ने अ़ब्बास पर मोक़ूफ़ (रुकी हुई) है। यह नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम से मुत्तसिल (मिली हई) नहीं है। किसी सबूत के बिना किसी पर कुछ अनिवार्य नहीं होता।

और ह़ज़रत इब्ने अ़ब्बास -रद़ीयल्लाहु अ़न्हु - कहते थे :  " अगर मासिक धर्म के बीच में संभोग करता है तो वह एक दीनार दान करे और अगर अंत में करे तो आधा दीनार दान करे।"

अह़मद बिन ह़ंबल कहते थे :  " हैसियत व ताक़त के हिसाब से ऐसे व्यक्ति को इख्तियार है चाहे एक दीनार दान करे या आधा। " ([2])

मैं कहता हूँ : यह ह़दीस़ सही़ह़ है, इसे इमाम हा़किम ने सही़ह़ कहा है। और इसे इमाम ज़हबी, इब्ने क़त़्त़ान, इब्ने दक़ीक़ अल ई़द, इब्ने तुर्कमानी, इब्ने क़य्यिम और इब्ने ह़जर ने इसे साबित रखा है। और इमाम अह़मद ने इसे ह़सन कहा है। ([3])

और जिन विद्वानों ने यह कहा कि ऐसा व्यक्ति अल्लाह से इस्तिग़फ़ार करे (यानी क्षमायाचना करे या क्षमा चाहे) और उस पर कोई कफ़्फ़ारा (कुछ दान देना ) अनिवार्य व वाजिब नहीं है। वे विद्वान यह हैं : सई़द बिन अल मुसय्यिब, सई़द बिन जुबैर, इब्राहीम नख़ई़, क़ासिम, शअ़बी, इब्ने सीरीन, इब्ने मुबारक और इमाम शाफ़ई़ अपने नए फतवे के हिसाब से। ([4])

 

मेरी मुस्लिम बहन!

उपर पता चला कि जो व्यक्ति माहवारी के दौरान अपनी पत्नी से योनि में संभोग करता है तो इस कार्य के कारण उस पर कफ़्फ़ारा ज़रूरी हो जाता है। और कफ़्फ़ारा तौबा और इस्तिग़फ़ार (अल्लाह से क्षमा चाहने ) के साथ साथ एक दीनार दान व सदका़ करना है। इब्ने क़य्यिम कहते हैं : इस बारे में ह़दीस़े इस बात का सबूत देती हैं कि जिसने माहवारी के दौरान अपनी पत्नी से संभोग किया तो उस पर कफ़्फ़ारा वाजिब (अनिवार्य ) है। ([5])



([1]) यह ह़दीस़ सही़ह़ है, इसे इमाम अह़मद ने (1/230, 237, 272, 286, 312, 325), अबु दाऊद ने (261), तिरमिज़ी ने (137), निसई ने (1/188), इब्ने माजह ने (640), इब्ने अल जारूद ने " अल मुन्तक़ा " में (108), हा़किम ने (1/171) और दार क़ुत़नी ( 3/287) व बइहक़ी दोनों अपनी सुनन में (1/314) उल्लेख किया है।

([2])मआ़लिमुस्सुनन(1/72)

([3]) इरवाउलग़लील(1/218)

([4]) मुस़न्नफ़े अ़ब्दुर्रज़्ज़ाक़ (1267), (1268), (1269), (1271), सुनने दारमी (1/252), (253) और सुनने बइहक़ी (1/308)

([5]) औ़नुलमअ़बूद(1/308)

 

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