पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - पाँचवां : क़िराअत



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Knowing Allah
  
  
---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

पाँचवां :क़िराअत

46- फिर अल्लाह तआला से पनाह मांगे।

47- और सुन्नत (मसनून तरीक़ा) यह है कि वह कभी यह दुआ पढ़ेः "अऊज़ो बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम ; मिन हम्ज़िही, व नफ्ख़िही, व नफ्सिही" (मैं अल्लाह के शरण में आता हूँ शापित शैतान ; उस के वस्वसे़, उस की घमण्ड, और उस के जादू से)  यहाँ पर नफ्स से मुराद निंदित पद्य (काव्य) है।

48- और कभी कभार यह दुआ पढ़ेः "अऊज़ो बिल्लाहिस् समीइल अलीमि मिनश्शैतानिर्रजीम... "

49- फिर जहरी (ज़ोर से पढ़ी जाने वाली) और सिर्री (आहिस्ता से पढ़ी जाने वाली) दोनों नमाज़ो में आहिस्ता से "बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम" पढ़े।




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