पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - आखिरी तशह्हुद और तवर्रुक़ का बयान



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

आखिरी तशह्हुद और तवर्रुक़ का बयानः

168- फिर आखिरी तशह्हुद के लिए बैठ जाये।

169- और इस में भी वही सब करे जो पहली तशह्हुद में किया था।

170- लेकिन इस तशह्हुद में तवर्रुक के आसन पर बैठे, अपने बायें कूल्हे को ज़मीन पर रखे और बायें पैर को दाहिनी पिंडली के नीचे कर ले।

171- और अपने दायें पैर को खड़ा रखे।

172- और कभी कभार उस को फैलाना (बिछाना) भी जाइज़ है।

173- और अपने घुटने को बायीं हथेली का लुक्मा बना कर अपना बोझ उस पर रखे।




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