पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - सलाम फेरना



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Knowing Allah
  
  
---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

सलाम फेरनाः

177- फिर अपने दायें जानिब सलाम फेरे, और यह नमाज़ का एक रुक्न है, यहाँ तक कि उस के दायें गाल की सफेदी दिखाई देने लगे।

178- और इसी प्रकार अपने बायें जानिब सलाम फेरे, यहाँ तक कि उस के बायें गाल की सफेदी दिखाई देने लगे।

179- और इमाम खूब बुलंद आवाज़ से सलाम फेरे।

180- और सलाम के कई प्रकार हैं -

प्रथमःअपने दायें जानिब "अस्सलामो अलैकुम व रहमतुल्लाहे व बरकातुह" कहे, और अपने बायें तरफ "अस्सलामो अलैकुम व रहमतुल्लाह" कहे।

दूसराःपहले ही की तरह सिवाये "व बरकातुह" के।

तीसराःअपने दायें तरफ "अस्सलामो अलैकुम व रहमतुल्लाह", और अपने बायें तरफ "अस्सलामो अलैकुम" कहे।

चौथाःअपने चेहरे के सम्मुख, अपने दायें तरफ थोड़ा सा मुड़ते हुए एक मर्तबा सलाम फेरे।

मेरे मुस्लिम भाइयो,  यह "सिफतो सलातिन्नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम" (नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नमाज़ का तरीक़ा) नामी किताब का सारांश है, जिस के द्वारा मेरा यह प्रयास है कि मैं (नमाज़े नबवी) के तरीक़े को इस प्रकार आप के निकट कर दूँ कि वह आप के लिए बिल्कुल स्पष्ट हो जाए और आप के ज़ेहन में समा जाये, मानो कि आप उसे अपनी आँख से देख रहे हैं। जब आप उस तरीक़े के अनुसार नमाज़ अदा करेंगे जो मैं ने आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नमाज़ का आप के सामने बयान किया है, तो मुझे अल्लाह तआला से उम्मीद है कि वह उसे आप की तरफ से क़ुबूल फरमायेगा ; क्योंकि इस प्रकार आप ने वास्तव में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के फरमान किः "तुम उसी तरह नमाज़ पढ़ो जिस तरह मुझे नमाज़ पढ़ते देखा है।" को पूरा कर दिखाया।

फिर इस के बाद आप नमाज़ के अंदर दिल व दिमाग को हाज़िर रखना और उस में खुशू व खुज़ू का ध्यान रखना न भूलें, क्योंकि नमाज़ में बन्दे के अल्लाह के सामने खड़ा होने का यही सब से बड़ा मक़्सद है, और जिस मात्रा में आप अपने दिल मे खुशू व ख़ुज़ू और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के नमाज़ की पैरवी को सच कर दिखायें गे, उतना ही आप को वह प्रतीक्षित लाभ प्राप्त होगा जिस की तरफ अल्लाह तआला ने अपने इस फरमान में संकेत किया हैः "निः सन्देह नमाज़ बेहयाई और बुरी बातों से रोकती है।"

अन्त में, अल्लाह तआला से प्रार्थना है कि वह हम से हमारी नमाज़ों और अन्य सभी आमाल को स्वीकार करे, और उन के सवाब (प्रतिफल) को हमारे लिए उस दिन के लिए संग्रहित कर के रखे जिस दिन हम उस से मुलाक़ात करेंगेः "जिस दिन धन ओर बेटे कुछ लाभ नहीं देंगे सिवाय उस व्यक्ति के जो अल्लाह के पास पवित्र दिल लेकर आये।" (सूरतुश शुअराः 88, 89) और सभी प्रशंसायें सर्व संसार के पालनहार के लिए हैं।

{ अल्लामा शैख़ मुहम्मद नासिरुद्दीन अल्बानी रहिमहुल्लाह की किताब "नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नमाज़का तरीक़ा - तकबीर से लेकर सलाम फेरने तक - मानो कि आप उन्हें देख रहे हैं" का सारांश }




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