पैगंबर हज़रत मुहम्मद के समर्थन की वेबसाइट - जूता पहन कर नमाज़ पढ़ना



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---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? ---क्या वह अपनी बच्ची के रोने के कारण जमाअत की नमाज़ तोड़ सकती है? --- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वुज़ू नींद से नहीं टूटता है। ---उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया गया जबकि वह बेगुनाह है, और उसके पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत व प्रमाण नहीं है। तो वह क्या करे? ---वादा-ख़िलाफ़ी सख़्ती से मना ---दुश्मन की लाशें उसके हवाले करना ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए ---दुश्मन की लाशों पर गु़स्सा न निकाला जाए

   

जूता पहन कर नमाज़ पढ़नाः

13- जिस प्रकार आदमी के लिए नंगे पैर नमाज़ पढ़ना जाइज़ है, उसी तरह उस के लिए जूता पहन कर भी नमाज़ पढ़ना जाइज़ है।

14- लेकिन अफज़ल (बेहतर) यह है कि कभी नंगे पैर नमाज़ पढ़े और कभी जूता पहन कर, जैसा कि उस के लिए आसान हो। अतः नमाज़ पढ़ने के लिए उन दोनों को पहनने का कष्ट न करे और न ही (यदि उन्हें पहने हुए है तो) उन दोनों को निकालने का कष्ट करे, बल्कि अगर नंगे पैर है तो नंगे पैर ही नमाज़ पढ़ ले, और अगर जूता पहने हुए है तो जूता पहने हुए नमाज़ पढ़े, सिवाय इस के कि कोई मामला पेश आ जाये।

15- और जब उन दोनों (जूतों) को निकाले तो उनको अपने दाहिने तरफ न रखे, बल्कि उसे अपने बायीं तरफ रखे जबकि उस के बायें तरफ कोई आदमी नमाज़ न पढ़ रहा हो, नहीं तो उन दोनों को अपने दोनों पैरों को बीच में रखे, (मैं कहता हूँ किः इस में हल्का सा इशारा है की आदमी जूतों को अपने सामने नहीं रखेगा, और यह एक शिष्टाचार है जिस की नमाजियों की बहुमत उपेक्षा करती है, अतः आप उन्हें  अपने जूतों की ओर नमाज पढ़ते हुए देखेंगे), अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से इस का आदेश साबित है।

 




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